1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. पहाड़ों को चीरकर रेलवे ने रचा इतिहास, उत्तराखंड में 10.8 किमी लंबी सुरंग का हुआ ब्रेकथ्रू

पहाड़ों को चीरकर रेलवे ने रचा इतिहास, उत्तराखंड में 10.8 किमी लंबी सुरंग का हुआ ब्रेकथ्रू

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Sep 12, 2026 08:30 pm IST,  Updated : Sep 12, 2026 08:30 pm IST

उत्तराखंड के पहाड़ों में रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना में 10.847 किलोमीटर लंबी सुरंग का फाइनल ब्रेकथ्रू पूरा हो गया है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल...- India TV Hindi
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का 41वां ब्रेकथ्रू सफल Image Source : RVNL X ACCOUNT

उत्तराखंड के दुर्गम और कठिन पहाड़ों के बीच रेल पहुंचाने का सपना अब बहुत तेजी से हकीकत में बदल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। 11 सितंबर 2026 को इस प्रोजेक्ट की एस्केप टनल-1 की खुदाई का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया, जिसे ब्रेकथ्रू कहा जाता है। यह इस पूरी रेल परियोजना का 41वां टनल ब्रेकथ्रू है। इसके साथ ही 10.847 किलोमीटर लंबी यह टनल अब पूरी तरह से आपस में जुड़ गई है, जो इस प्रोजेक्ट की दूसरी सबसे लंबी सुरंग बन गई है।

हिमालय की खतरनाक चट्टानों को मात देकर बनी सुरंग

यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इस टनल के निर्माण के दौरान भारतीय इंजीनियरों को हिमालय के बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण भूविज्ञान का सामना करना पड़ा। टनल का पूरा रास्ता ज्यादा फॉल्टेड और टूटी-फूटी चट्टानों के बीच से होकर गुजरता है। निर्माण के दौरान मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) की मौजूदगी के कारण भारी मलबे, लगातार ढहने वाली मिट्टी और कमजोर चट्टानों की वजह से काफी जोखिम था। हालांकि, आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और सुरक्षा उपायों के दम पर RVNL की Rishikesh PIU टीम ने पहाड़ों का सीना चीरकर इस कठिन काम को अंजाम दिया।

चारधाम यात्रा होगी आसान

इस 41वें ब्रेकथ्रू के साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर तेजी से बढ़ रही है। प्रोजेक्ट में कुल 46 टनल ब्रेकथ्रू होने थे, जिनमें से 41 सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। RVNL के अधिकारियों के अनुसार, बची हुई केवल 5 सुरंगों का ब्रेकथ्रू काम भी अगले एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ी इलाकों तक ट्रेन पहुंचाने का दशकों पुराना सपना साकार हो जाएगा।

उत्तराखंड के लिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी हिमालयी रेलवे परियोजनाओं में से एक है। कर्णप्रयाग तक रेल सेवा शुरू होने से बद्रीनाथ, केदारनाथ, जोशीमठ और हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का समय काफी बचेगा। वहीं, दुर्गम इलाकों में रेल पहुंचने से रोजगार, व्यापार और पर्यटन में कई गुना बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, चीन सीमा के करीब होने के कारण यह रेल लाइन भारतीय सेना के तुरंत आवागमन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें- रेलवे ने 4 एक्सप्रेस ट्रेनों की टाइमिंग बदली, 9 और ट्रेनों का समय जल्द बदलेगा; देखें पूरी लिस्ट

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा