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क्या BRICS बदलना चाहता है ग्लोबल सिस्टम? UN से लेकर IMF-WTO तक में सुधार की मांग

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 12, 2026 07:44 pm IST,  Updated : Sep 12, 2026 07:45 pm IST

BRICS वैश्विक संस्थाओं में सुधार, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वैकल्पिक वित्तीय नेटवर्क, मैन्युफैक्चरिंग, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। अब यह सिर्फ आर्थिक सहयोग और डॉलर के विकल्प की चर्चा तक सीमित नहीं है। इसकी झलक नई दिल्ली के घोषणापत्र में स्पष्ट तौर पर देखने को मिली।

BRICS Summit- India TV Hindi
ब्रिक्स सम्मेलन 2026, नई दिल्ली Image Source : PTI

नई दिल्ली: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में जो अहम बात निकलकर सामने आई.. वो ये है कि अब यह मंच केवल कुछ सीमित क्षेत्रों तक सिमट कर नहीं रह गया है। इसके एजेंडे में अब वैश्विक संस्थाओं में सुधार, स्थानीय करेंसी में व्यापार, वैकल्पिक फाइनेंस नेटवर्क, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, AI, क्वांटम जैसे मुद्दे शामिल हो चुके हैं। इसके पीछे बड़ी सोच यह है कि वर्ल्ड ऑर्डर में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए, उनके प्रभाव को भी बढ़ाया जाए। वहीं BRICS के घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की भी निंदा की गई है।

ग्लोबल गवर्नेंस 

घोषणापत्र में सबसे अहम बदलाव ग्लोबल गवर्नेंस को लेकर है। BRICS यूनाइटेड नेशंस, यूनाटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ, डब्ल्यूटीओ जैसी संस्थाओं में सुधार की मांग कर रहा है। BRICS का कहना है कि दुनिया की बदली हुई वास्तविकताओं के मुताबिक इनका प्रतिनिधित्व हो। भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन किया है।

वित्तीय व्यवस्था

वहीं वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी BRICS के अंदर चर्चा हो रही है। हालांकि इस समूह का ऐसा कोई लक्ष्य नहीं कि कोई नई करेंसी वह लॉन्च करें। लेकिन इसके सदस्य देशों का मानना है कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, भुगतान प्रणालियों, वित्तीय कनेक्टिविटी और New Development Bank को मजबूत करना है। यानी देशों के पास वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में ज्यादा विकल्प हों और वे किसी एक सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर न रहें।

BRICS का विस्तार

BRICS अब पांच देशों तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसका विस्तार हुआ है। नए देशों के जुड़ने से इस ग्रुप की ताकत बढ़ी है। ग्लोबल साउथ के देशों को विकास  वित्त, व्यापार और ग्लोबल गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर सामूहिक रूप से अपनी बात रखने का बड़ा मंच मिला है।

ट्रेड

वहीं ट्रेड की बात करें तो BRICS ने एकतरफा टैरिफ, संरक्षणवाद और आर्थिक दबाव का विरोध किया है।  इसका मतलब फ्री ट्रेड नहीं है, बल्कि इस बात को रखना है कि आखिर ग्लोबल ट्रेड के नियम कौन नियम कौन बनाता है और क्या वे नियम विकासशील देशों के लिए सही तरीके से काम करते हैं।

 मैन्युफैक्चरिंग

एक और मुद्दा है  मैन्युफैक्चरिंग का जो कि खास तौर पर काफी अहम है। BRICS का फोकस MSMEs, ग्लोबल वैल्यू चेन और मजबूत सप्लाई चेन पर बढ़ रहा है। इस ओर इशारा करता है कि देश सिर्फ़ कच्चा माल या सस्ता लेबर सप्लाई करना नहीं बल्कि देश ग्लोबलाइज़ेशन से बनी वैल्यू में बड़ा हिस्सा चाहते हैं। यह सीधे तौर पर भारत के मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों से जुड़ा है। 

टेक्नोलॉजी 

टेक्नोलॉजी की बात करें तो AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी से मुद्दे BRICS के एजेंडे में आ रहे हैं। इससे साफ है कि तकनीक अब केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीतिक और जियो पॉलिटिक्स की ताकत का आधार भी बन रही है।

आतंकवाद

वहीं आतंकवाद के मोर्चे पर भी BRICS का रुख स्पष्ट है। आतंकवाद, आतंक की फंडिंग, आतंकियों की सीमा-पार आवाजाही और सुरक्षित पनाहगाह जैसे मुद्दों पर भी BRICS ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी कड़ी में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई है। 

अगर इन सभी बदलावों को एक साथ देखें तो BRICS अचानक कोई नया वर्ल्ड ऑर्डर नहीं बना रहा है। बल्कि वह धीरे-धीरे आर्थिक, वित्तीय, तकनीकी और राजनीतिक विकल्पों के जरिए पारंपरिक पावर सेंटर्स से बाहर के देशों के लिए ज्यादा जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।

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