अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में फिर गिरावट देखने को मिली है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसे की निकासी के चलते यह गिरावट आई है। आपको बता दें कि बुधवार को शुरुआती कारोबार में 25 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.86 पर आ गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि हालांकि सकारात्मक घरेलू शेयर बाजारों, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत कम रहने और कमजोर अमेरिकी डॉलर ने गिरावट को कम किया। बताते चलें कि अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया कमजोर रुख के साथ 85.69 प्रति डॉलर पर खुला। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.86 पर आ गया जो पिछले बंद भाव से 25 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
रुपये में गिरावट के मुख्य कारण
- डॉलर की बढ़ती मांग: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के चलते डॉलर की मजबूत मांग बनी हुई है। निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में डॉलर की ओर रुख करते हैं, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है।
- विदेशी निवेश में कमी: विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे भी रुपया कमजोर हुआ है।
रुपये कमजोर होने का आप पर असर
- महंगाई में वृद्धि: रुपये के कमजोर होने से आयातित वस्तुएं महंगी होती हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है।
- विदेश यात्रा और शिक्षा महंगी: डॉलर महंगा होने से विदेश यात्रा और शिक्षा की लागत बढ़ती है।
- निर्यातकों को लाभ: रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को अधिक लाभ होता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में अधिक रुपये मिलते हैं।
डॉलर इंडेक्स 99 के करीब
रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.61 पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05% की गिरावट के साथ 99.18 पर रहा। घरेलू शेयर बाजार में बीएसई सेंसेक्स 230.17 अंक की बढ़त के साथ 80,967.68 अंक पर जबकि निफ्टी 70.25 अंक चढ़कर 24,612.75 अंक पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.32% की गिरावट के साथ 65.42 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) मंगलवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 2,853.83 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।