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Masik Durgashtami Vrat 2026: 22 जून को रखा जाएगा मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजन विधि

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jun 21, 2026 08:28 pm IST,  Updated : Jun 21, 2026 08:28 pm IST

Masik Durgashtami 2026: मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाती हैं। तो यहां जानिए पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त के बारे में।

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत 2026- India TV Hindi
मासिक दुर्गाष्टमी व्रत 2026 Image Source : PEXELS

Durga Ashtami 2026: सोमवार को मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस मां दुर्गा की उपासना करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। बता दें कि प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी व्रत किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु दुर्गा माता की पूजा करते हैं और उनके लिए पूरे दिन का व्रत करते हैं। तो आइए जानते हैं कि मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त के बारे में।

मासिक दुर्गाष्टमी शुभ मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ट माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 21 जून को दोपहर  03 बजकर 20 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि का समापन 22 जून को दोपहर 03 बजकर 39 मिनट पर होगा। इस दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि

  • मासिक दुर्गाष्टमी के प्रातःकाल उठ कर स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद मां देवी के निमित्त व्रत रखने और पूजा करने का संकल्प लें।
  • अब मंदिर या पूजा घर को साफ कर गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। 
  • इसके बाद  एक चौकी रखें और उस पर लाल रंग का नया वस्त्र बिछा लें। फिर माता रानी की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
  • देवी मां की मूर्ति की स्थापना के बाद लाल गुलहड़ का फूल, लाल चुनरी, सोलह श्रृंगार और अक्षत आदि पूजा सामग्री अर्पित करें।
  • मां दुर्गा को मेवा-मिष्ठान,फल, खीर, हलवा आदि चीजों का भोग लगाएं। 
  • माता रानी की प्रतिमा के सामने देशी घी का दीपक अवश्य जलाएं।
  • इसके बाद दुर्गासप्तशती का पाठ करें और आरती के बाद मंत्रों का जाप भी जरूर करें।

मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन इन मंत्रों का करें जाप

  1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।
  2. ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।
  3. या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  4. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  5. या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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