Viral News : गुरुग्राम की एक महिला ने अपने साथ हुए किरायेदारी के बुरे अनुभव को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। आरोप है कि उसे एक घंटे के भीतर अपना किराए का अपार्टमेंट खाली करने के लिए कहा गया, जिससे वह अपने सामान के साथ फंसी रह गई और उसे मजबूरन एक होटल में ठहरना पड़ा। महिला ने इंस्टाग्राम पोस्ट में इस घटना के बारे में बताते हुए कहा कि, 'व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की कीमत मेहनतकश वर्ग को चुकानी पड़ रही है।'
इंस्टाग्राम पर बताया सबसे बड़ा डर
इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर ohgodd_sanghu नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस पोस्ट में महिला ने कहा कि, वह किसी पेइंग गेस्ट में नहीं बल्कि एक वैध रूप से सुसज्जित अपार्टमेंट में रह रही थीं, जिसके लिए वह अच्छा-खासा किराया दे रही थीं। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'सिस्टमैटिक करप्शन की मानवीय कीमत: गुरुग्राम में एक किराएदार का बुरा सपना। फिलहाल एक होटल के कमरे में ठहर रही हूं क्योंकि मैं और मेरा सामान सड़क पर फंसे हुए हैं, बेघर।' महिला ने आरोप लगाया कि कई निवासियों को अचानक फोन आए जिनमें उन्हें अपना सारा सामान बैग में भरकर एक घंटे के भीतर घर खाली करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने बताया कि घटना के समय वह ओडिशा में अपने माता-पिता से मिलने गई हुई थीं। उन्होंने लिखा, मैं गुरुग्राम में भी नहीं थी। मैं हजारों किलोमीटर दूर ओडिशा में अपने माता-पिता से मिलने गई थी, ताकि जीवन और करियर के एक नए अध्याय में कदम रखने से पहले उनका आशीर्वाद ले सकूं। खुशी मनाने के बजाय, मुझे पूरी तरह से घबराहट होने लगी।'
'कमरे का ताला तोड़कर दोस्तों ने बचाए डॉक्यूमेंट्स'
महिला का दावा है कि, उसके दोस्तों को ताला तोड़कर उसके कपड़े और ज़रूरी दस्तावेज़ बचाने पड़े। उसने कहा, 'मेरा सारा सामान या तो अंदर फंस गया होगा या नष्ट हो गया होगा।' उसने आगे कहा कि ताला तोड़ने का खर्च उसकी सिक्योरिटी मनी से काटा जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रभावित लोगों में छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता वाले परिवार भी शामिल थे। उन्होंने लिखा, 'जिन लोगों ने बिल्कुल भी कोई गलती नहीं की है, वे पूरी तरह से बेघर हो गए हैं और भीषण गर्मी में बेसहारा हो गए हैं।' उन्होंने अधिकारियों और संपत्ति मालिकों पर बुनियादी मानवीय सहानुभूति की कमी दिखाने का आरोप लगाया।
बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर उठाए सवाल
महिला ने कहा कि, 'हम अपने गृहनगर, अपने परिवार और अपने घरों के आराम को छोड़कर इस शहर में रोजी-रोटी कमाने आते हैं। दिन-रात मेहनत करते हैं, नौकरी की तलाश करते हैं और अपने परिवारों के सपनों को पूरा करते हैं। हम पहले से ही बेतहाशा किराया देते हैं और जीवन यापन की अत्यधिक महंगी लागत को झेलते हैं, जिससे हमारी जेब पर भारी बोझ पड़ता है। हम नियमित रूप से कर अदा करते हैं - भगवान ही जाने वह पैसा कहाँ जाता है, क्योंकि यहां का बुनियादी ढांचा हर दिन बदहाल रहता है।' इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आगे लिखा कि मालिकों को कथित तौर पर स्थिति की जानकारी थी लेकिन उन्होंने किरायेदारों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी। उन्होंने अधिकारियों पर सालों से अवैध हाइराइज निर्माणों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि उसने 'निर्दोष नागरिकों को सड़क पर धकेल दिया। दोष किसका है? निर्माता का? भ्रष्ट राज्य का? भगवान का? पंचभूत का?'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इन पोस्टों ने ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं की बाढ़ ला दी, जिसमें कई यूजर्स ने दावा किया कि उन्हें भी इसी तरह की स्थितियों का सामना करना पड़ा था। एक यूजर ने लिखा, 'मेरी बिल्डिंग में भी ऐसा ही हुआ।'
दूसरे ने लिखा कि, 'इसीलिए हम इस शहर को छोड़ रहे हैं, यहां लगभग 17 साल हो गए हैं और मैं स्पष्ट रूप से कह सकता हूं कि ये शहर बर्बादी की तरफ जा रहा है साथ ही यहां रोजाना इतनी सारी आपराधिक घटनाएं होती हैं।'
तीसरे ने लिखा कि, 'यही हमारे देश की सच्चाई है, जिन नेताओं के लिए हम अपने दोस्तों और परिवार के साथ लड़ते हैं, इस समय क्या वैध है और क्या अवैध, इसका कोई मतलब नहीं रह गया है। भारत में गर्व से जीना सबसे महंगा सौदा है जिसे कोई सहन कर सकता है। अगर आप गरीब हैं और झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं, तो आपको खाना और आश्रय दिया जाएगा और बाद में उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इस देश को पूरी तरह से बदलने की जरूरत है, अब इसकी मरम्मत संभव नहीं है।'
चौथे ने लिखा कि, 'दुर्भाग्यपूर्ण, लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि आम लोगों की कोई आवाज नहीं होती, जब तक कि आप बेहद अमीर, राजनीतिक रूप से प्रभावशाली या कोई वीआईपी न हों। आम लोग केवल गड्ढों, भ्रष्टाचार, व्यवस्थागत विफलताओं का सामना करने और कर चुकाने के लिए ही मौजूद हैं।'
एक और ने लिखा कि, 'इसीलिए किराये के समझौते पर आंख बंद करके हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए। आमतौर पर किराये के समझौते में दोनों पक्षों की ओर से कम से कम 1 महीने का नोटिस शामिल होता है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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