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जलवायु परिवर्तन की वजह से खतरनाक बन रही हैं मौसमी घटनाएं, यहां हैं भयावह हालात; 100 से अधिक की मौत

 Published : Jan 29, 2026 01:50 pm IST,  Updated : Jan 29, 2026 01:50 pm IST

दुनिया के तमाम देशों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव साफ देखने को मिल रहा है। दक्षिणी अफ्रीका भी एक ऐसा ही क्षेत्र है जहां मौसम से संबंधित घटनाएं चिंता का विषय बन गई है। यह बात शोध में सामने आई है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव- India TV Hindi
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव Image Source : AP

जोहान्सबर्ग: दुनिया भर में मौसम से संबंधित घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। कहीं तूफान, कहीं बर्फबारी, कहीं  भारी बारिश और कहीं प्रचंड गर्मी जैसी मौसमी घटनाओं ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। मौसम में हो रहे बदलावों के पीछे सबसे बड़ी वजहें इंसानों से जुड़ी हुई हैं। इसी को लेकर शोधकर्ताओं ने बताया है कि इंसानों की वजह से हुए जलवायु परिवर्तन ने दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बारिश और बाढ़ को और अधिक विनाशकारी बना दिया है। इस आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई  है और 3 लाख से ज्यादा लोग अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

10 दिनों में हो गई पूरे साल की बारिश

वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन (WWA) के एक अध्ययन में दक्षिण अफ्रीका, मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे और इस्वातिनी के प्रभावित इलाकों में हुई अत्यधिक भारी वर्षा का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, इस क्षेत्र में मात्र 10 दिनों में एक पूरे साल जितनी बारिश हुई है। इसके चलते बड़े पैमाने पर घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसकी आर्थिक क्षति लाखों डॉलर में आंकी जा रही है। 

मोजाम्बिक में कई इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए, जबकि दक्षिण अफ्रीका के लिम्पोपो और म्पुमलंगा प्रांतों तथा जिम्बाब्वे के कुछ हिस्सों में सड़कें और पुल बह गए हैं। 

दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया अध्ययन

यह अध्ययन दुनिया भर के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें पीयर-रिव्यूड विधियों का उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन किया गया। अध्ययन में स्पष्ट रूप से पाया गया कि चरम वर्षा की तीव्रता में लगभग 40 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण है। यह स्थिति वर्तमान कमजोर ला नीना मौसम पैटर्न से भी बढ़ी, जो स्वाभाविक रूप से दक्षिणी अफ्रीका में अधिक नमी लाता है, लेकिन अब गर्म होते वायुमंडल में यह और घातक साबित हो रहा है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
Image Source : APजलवायु परिवर्तन का प्रभाव

बारिश की तीव्रता बढ़ रही है

रॉयल नीदरलैंड्स मौसम विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ जलवायु शोधकर्ता और अध्ययन के सह-लेखक इजिडीन पिंटो ने कहा, "हमारा विश्लेषण साफ दिखाता है कि जीवाश्म ईंधन के निरंतर जलने से ना सिर्फ चरम बारिश की तीव्रता बढ़ रही है, बल्कि ऐसी घटनाएं जो पहले भी होती थीं, अब कहीं अधिक गंभीर हो गई हैं।" पिंटो ने आगे बताया कि बारिश की तीव्रता में 40 प्रतिशत वृद्धि को मानव-जनित जलवायु परिवर्तन का प्रभाव है। उन्होंने कहा, "जो पहले भारी बारिश की एक सामान्य अवधि होती, वह अब भयानक बाढ़ में बदल गई है।"

उम्मीद से कहीं ज्यादा भयावह हुआ मौसम

दक्षिणी अफ्रीका के ये इलाके भारी बारिश और बाढ़ से अपरिचित नहीं हैं, लेकिन हाल की घटना ने वैज्ञानिकों को भी चिंतित कर दिया है। मोजाम्बिक मौसम सेवा के शोधकर्ता बर्नाडिनो न्हांटुम्बो ने कहा, "यह घटना हमारे लिए आश्चर्यजनक थी, क्योंकि हमने ऐसी बाढ़ 25 साल पहले देखी थी। कुछ जगहों पर 2 से 3 दिनों में इतनी बारिश हुई जितनी पूरे मानसून सीजन में होने की उम्मीद होती है, इसलिए इससे संभालना बेहद मुश्किल था।"

9 नदियों के निचले हिस्से में स्थित है मोजाम्बिक

न्हांटुम्बो के अनुसार, मोजाम्बिक 9 प्रमुख नदियों के निचले हिस्से में स्थित है, इसलिए भारी बारिश के साथ नदियों में उफान आने से नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, "हमारे पास अच्छे पूर्वानुमान मॉडल हैं, लेकिन ऐसी चरम घटनाओं में अच्छी भविष्यवाणी के बावजूद नुकसान को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता।" मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां गाजा प्रांत की राजधानी जाई-जाई और चोकवे शहर बड़े पैमाने पर डूब गए। 

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
Image Source : APजलवायु परिवर्तन का प्रभाव

शोधकर्ताओं ने इस बात पर दिया जोर

शोधकर्ताओं ने जोर दिया कि अफ्रीका में स्थानीय जलवायु मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि महाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सके। लंदन के इंपीरियल कॉलेज में सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल पॉलिसी की जलवायु विज्ञान प्रोफेसर फ्रीडेरिक ओटो ने कहा कि उपलब्ध अधिकांश जलवायु मॉडल अमेरिका, यूरोप और कुछ एशियाई केंद्रों में विकसित किए गए हैं, अफ्रीका में कोई नहीं। इस वजह से ये मॉडल उन क्षेत्रों के लिए बेहतर काम करते हैं जहां वो बने हैं, और अफ्रीका के लिए उनकी सटीकता कम हो जाती है। यही कारण है कि हाल की बाढ़ में जलवायु परिवर्तन की भूमिका को ठीक-ठीक मापना मुश्किल रहा। यह अध्ययन दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन अब चरम मौसमी घटनाओं को और खतरनाक बना रहा है, खासकर कमजोर और विकासशील क्षेत्रों में जहां तैयारी और संसाधन सीमित हैं।

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