Friday, January 30, 2026
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Budget 2026: क्या बढ़ते हॉस्पिटल बिल और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलेगी छूट, IRDAI से है डिमांड

यह समस्या अब सिर्फ व्यक्तिगत स्तर की नहीं रही। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता से जुड़ी हुई है। समय आ गया है कि सरकार और इंडस्ट्री मिलकर इसे प्राथमिकता दें। बजट में सरकार इसके लिए कुछ खास प्रावधान की घोषणा करें।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 30, 2026 09:12 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 09:12 pm IST
मेडिकल महंगाई और बढ़ते क्लेम कॉस्ट के कारण हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। - India TV Paisa
Photo:FREEPIK मेडिकल महंगाई और बढ़ते क्लेम कॉस्ट के कारण हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

आगामी बजट में लोगों को भारत में मेडिकल महंगाई और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की लगातार बढ़ती दर से राहत मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री इस संबंध में कुछ घोषणाएं कर सकती हैं। मेडिकल महंगाई ने मिडिल क्लास परिवारों के लिए वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है। अस्पताल के भारी बिल और महंगे प्रीमियम अब कई परिवारों की बचत और लंबी अवधि की वित्तीय योजनाओं को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में बीमा नियामक से कुछ डिमांड है।

मेडिकल महंगाई: एशिया में सबसे ऊंचा स्तर

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सर्जरी, डायग्नोस्टिक्स, मेडिकल डिवाइसेस और एडवांस्ड थेरेपीज की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। विशेषज्ञ के अनुसार, प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर बढ़ती लागत का मुख्य कारण है। अस्पताल भर्ती शुल्क, नई तकनीकें और क्रॉनिक बीमारियों के इलाज ने बिलों को लगातार ऊचा किया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मेडिकल महंगाई की दर 12-15% सालाना है, जो सामान्य उपभोक्ता महंगाई (सीपीआई) से कई गुना अधिक है और एशिया में सबसे ऊंची मानी जाती है। 2026 के लिए मेडिकल ट्रेंड रेट 11.5%–12.9% तक अनुमानित किया गया है।

हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज बढ़ा, लेकिन पर्याप्त नहीं

IRDAI के आंकड़ों के मुताबिक, स्वास्थ्य बीमा कवरेज 2014-15 में 2.88 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 58.20 करोड़ लोगों तक पहुंच गया है, और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम लगभग ₹1.17 लाख करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन कुल पेनिट्रेशन सिर्फ 3.7% है, जिससे लाखों परिवार अभी भी पर्याप्त सुरक्षा से वंचित हैं।

प्रीमियम में लगातार बढ़ोतरी

मेडिकल महंगाई और बढ़ते क्लेम कॉस्ट के कारण हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2025-26 में प्रीमियम 10-15% तक बढ़ सकते हैं। जानकारों के मुताबिक, बीमाकर्ताओं के बढ़ते क्लेम दबाव प्रीमियम बढ़ाने का कारण हैं। बीमा नियामक द्वारा लक्षित नियामक हस्तक्षेप इस दबाव को कम कर सकता है और पॉलिसीधारकों पर मेडिकल महंगाई के प्रभाव को घटा सकता है।

बिलिंग में पारदर्शिता की कमी

अस्पतालों की बिलिंग प्रथाएं अक्सर पारदर्शी नहीं होतीं, जिससे मरीज यह नहीं जान पाते कि वे जरूरी सेवाओं के लिए भुगतान कर रहे हैं या अनावश्यक अतिरिक्त चार्जेस का बोझ उठा रहे हैं। यह मरीजों का भरोसा तोड़ता है और खर्च को नियंत्रण से बाहर कर देता है।

सरकारी हस्तक्षेप की बढ़ती मांग

विशेषज्ञ सरकार, बीमा नियामक, बीमा कंपनियों और अस्पताल समूहों से समन्वित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्हें अस्पतालों की मूल्य संरचना में समानता लाने, बिलिंग को मानकीकृत करने, कुछ दवाओं और प्रक्रियाओं की कीमतों की समीक्षा करने और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बजट 2026 से उम्मीद है कि इसमें मेडिकल महंगाई और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को नियंत्रित करने के लिए ठोस प्रस्ताव शामिल होंगे, जिससे आम लोगों की जेब पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके।

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