बजट 2026 के नजदीक आते ही कृषि, जलवायु नीति और रियल एस्टेट क्षेत्र के विशेषज्ञ सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि वह सिर्फ मामूली सुधारों तक सीमित न रहे, बल्कि दीर्घकालिक मजबूती, सतत विकास और प्रभावी बाजार तंत्र पर ध्यान केंद्रित करे। उनका मानना है कि अब नीति की स्पष्टता, लक्षित खर्च और दीर्घकालिक रणनीतियां ही आर्थिक स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित कर सकती हैं, न कि सिर्फ बड़े आंकड़े।
कृषि क्षेत्र पर जलवायु जोखिम
जानकार के मुताबिक, तापमान में सिर्फ 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी भी फसल पैदावार को 4.5–9% तक घटा सकती है, जिससे सालाना जीडीपी में 1.5% तक का नुकसान हो सकता है। इस संकट से निपटने के लिए शर्मा ने नेशनल इनोवेशन इन क्लाइमेट रेसिलिएंट एग्रीकल्चर परियोजना के लिए निरंतर फंडिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। यह परियोजना जलवायु-सहिष्णु तकनीकों और स्थानीय स्तर पर अनुकूलन को बढ़ावा देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजनाओं जैसे ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ और ‘हर खेत को पानी’ के तहत सिंचाई क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत है। हालांकि माइक्रो-सिंचाई कवरेज बढ़ रहा है, लेकिन फंडिंग अभी पर्याप्त नहीं है।
उर्वरक और मूल्य समर्थन
विशेषज्ञों का कहना है कि उर्वरक के संतुलित उपयोग और प्रोत्साहन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। भारत में यूरिया का उपभोग वैश्विक औसत से कहीं अधिक है और क्षेत्रीय अंतर भी काफी हैं। PM-PRANAM और मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस जैसी योजनाएं संतुलित और जैविक इनपुट को बढ़ावा देती हैं, लेकिन वित्त वर्ष के उर्वरक बजट में इनका हिस्सा केवल 0.1% है। इसलिए, उत्पादन प्रभावित हुए बिना स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बजट आवंटन बढ़ाना जरूरी है।
फसल आय और मूल्य समर्थन
PM-AASHA योजना के तहत मूल्य समर्थन का कम इस्तेमाल भी चिंता का विषय है। शर्मा ने सुझाव दिया कि बजट आवंटन बढ़ाया जाए, DBT भुगतान तेज किए जाएं और राज्य स्तर पर प्रोत्साहन को मजबूत किया जाए। जानकारों का कहना है कि बुनियादी ढांचे में निवेश और नीति स्थिरता पर जोर बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना का विस्तार और ग्रीन हाउसिंग के लिए प्रोत्साहन शहरी मांग और सतत विकास को बढ़ावा देंगे।
कृषि वित्त और भंडारण
जानकार ने ई-निगोशिएबल वेयरहाउस रसीदों (e-NWRs) की क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह किसानों की तरलता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि माइक्रो-वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और किसान जागरूकता पर अधिक निवेश की जरूरत है, ताकि किसानों को मजबूरी में अपने उत्पाद बेचना न पड़े।






































