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Budget 2026: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने को मिल सकती है गति, ये उपाय हैं जरूरी

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : Jan 30, 2026 05:20 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 05:21 pm IST

विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस और त्वरित परिणाम हासिल करने के लिए सरकार को रक्षा बजट का कम से कम 10% हिस्सा R&D के लिए निर्धारित करना चाहिए

भारत रक्षा खर्च के मामले में विश्व के शीर्ष पांच देशों में शामिल है।- India TV Paisa
Photo:PTI भारत रक्षा खर्च के मामले में विश्व के शीर्ष पांच देशों में शामिल है।

आगामी बजट में सरकार देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए जोरदार पहल कर सकती है। जानकारों का कहना है कि भारत में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति वर्ष 2001 में दी गई थी, जिसे 2020 में और अधिक उदार बनाया गया। अब आवश्यकता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनियों और देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करे, जिससे अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण, सह-विकास और नवाचार तेज हो सके। इसके लिए रक्षा प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ तकनीक हस्तांतरण के तहत आने वाले विदेशी घटकों को स्वदेशी सामग्री की गणना से आंशिक या पूर्ण छूट देने जैसे व्यावहारिक सुधारों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

भारत विश्व के शीर्ष पांच देशों में

भारत रक्षा खर्च के मामले में विश्व के शीर्ष पांच देशों में शामिल है, लेकिन अमेरिका, चीन और रूस की तुलना में उसका कुल रक्षा व्यय अभी भी काफी कम है। इसके बावजूद, बीते एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014–15 में जहां रक्षा उत्पादन ₹0.46 लाख करोड़ ($5.1 बिलियन) था, वहीं 2024–25 में यह बढ़कर ₹1.50 लाख करोड़ ($16.5 बिलियन) तक पहुंच गया। इस सकारात्मक रुझान को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने वर्ष 2029 तक ₹3 लाख करोड़ ($33 बिलियन) के रक्षा उत्पादन और ₹0.5 लाख करोड़ ($5.5 बिलियन) के वार्षिक रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जो भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में स्पष्ट संकेत देता है।

रक्षा व्यय को लगभग 20% तक बढ़ाने की जरूरत

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र के विकास का तीसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में निरंतर वृद्धि है। बजट 2025–26 में कुल रक्षा बजट में लगभग 10% की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण के लिए आवश्यक पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित- लगभग 5% रही। इस असंतुलन को स्वीकार करते हुए रक्षा सचिव ने हाल ही में संकेत दिया है कि बजट 2026–27 में रक्षा व्यय को लगभग 20% तक बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करना होगा

पूंजीगत व्यय के साथ-साथ रक्षा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में मजबूत और निरंतर निवेश भी उतना ही आवश्यक है। भारत ने बजट 2025–26 में ₹6.81 लाख करोड़ ($74.8 बिलियन) के कुल रक्षा बजट में से केवल ₹26,816 करोड़ ($2.9 बिलियन) R&D के लिए आवंटित किए हैं। इसके मुकाबले, वैश्विक तकनीकी अग्रणी अमेरिका ने वर्ष 2025 में रिसर्च, डेवलपमेंट, टेस्टिंग एंड इवैल्यूएशन (RDT&E) के लिए $141.2 बिलियन का विशाल बजट तय किया है।

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