Friday, January 30, 2026
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Budget 2026: हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल सेक्टर की ये है विशलिस्ट, अहम सुधारों की हुई डिमांड

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026-27 का बजट स्वास्थ्य क्षेत्र की मौजूद चुनौतियों और भविष्य के अवसरों को ध्यान में रखते हुए भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्वास्थ्य हब बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 30, 2026 08:37 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 08:37 pm IST
पिछले साल 2025 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग ₹99,858 करोड़ का प्रावधान किया था। - India TV Paisa
Photo:PIXABAY AND SANSAD TV पिछले साल 2025 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग ₹99,858 करोड़ का प्रावधान किया था।

बजट 2026 की तैयारियों के बीच स्वास्थ्य और फार्मास्युटिकल सेक्टर में काम करने वाले विशेषज्ञ और इंडस्ट्री लीडर्स सरकार से विशेष इंतज़ार कर रहे हैं। उनका मानना है कि केवल बजटीय बढ़ोतरी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि मेडिकल टूरिज्म, घरेलू दवा निर्माण, डिजिटल हेल्थ और प्राथमिक देखभाल जैसे अहम क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधार और फोकस्ड निवेश जरूरी हैं। इस साल के बजट से इन सेक्टर्स में नई नीति पहल और वित्तीय समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत का हेल्थ इकोसिस्टम ज्यादा सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।

पिछले साल 2025 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग ₹99,858 करोड़ का प्रावधान किया था। इस आवंटन में मेडिकल शिक्षा के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और जीवनरक्षक दवाओं की लागत घटाने के लिए कस्टम ड्यूटी में छूट जैसी महत्वपूर्ण पहलें शामिल थीं।

मेडिकल टूरिज्म

पिछले वर्ष भारत में मेडिकल टूरिज्म में लगातार सुधार देखा गया। बेहतर अस्पताल परिणाम, अंतरराष्ट्रीय स्तर की मान्यता और किफायती लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से वैश्विक स्तर पर रुचि बढ़ी है। ndtv की खबर के मुताबिक, पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अप्रैल तक कुल 1,31,856 विदेशी पर्यटक चिकित्सा उपचार के लिए भारत आए, जो कुल विदेशी पर्यटक आगमन का करीब 4.1% था। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट इस गति को और तेज करने में अहम भूमिका निभा सकता है। 

फार्मास्युटिकल सेक्टर पर विशेष फोकस

हृदय रोग, कैंसर, क्रॉनिक रेस्पिरेटरी बीमारियां और डायबिटीज जैसी गैर-संचारी बीमारियां आज सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां बनी हुई हैं। WHO के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में इन बीमारियों के चलते कुल मौतों का लगभग 52-55% हिस्सा हैं, जहां प्रतिवर्ष करीब 90 लाख से 95 लाख लोग इन बीमारियों से मरते हैं। फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, तकनीकी अपनाने और निरंतर वित्तपोषण मॉडल पर जोर देना आवश्यक है।"

मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता

पिछले बजट में मेडिकल डिवाइस और फार्मास्युटिकल्स में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) और नियामकीय सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। हालांकि, नाइट्राइल ग्लव्स जैसे कुछ उत्पाद अभी भी आयात पर निर्भरता और कीमतों के दबाव से जूझ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, 2026 के बजट में घरेलू निर्माताओं के लिए संरचनात्मक सुधार और मजबूत प्रोत्साहन जरूरी हैं। 

डिजिटल हेल्थ

AI और डिजिटल तकनीक के दौर में स्वास्थ्य सेवा वितरण का केंद्र डिजिटल हेल्थ बन चुका है। डेटा सुरक्षा और साइबर मजबूती अब सबसे बड़ी चिंताएं हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत का स्वास्थ्य ईकोसिस्टम तेजी से डिजिटल मॉडल की ओर बढ़ रहा है। अब अगली चुनौती सुरक्षित डिजिटल अपनाने, क्लिनिकल सटीकता बढ़ाने और परिचालन दक्षता में सुधार की है।

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