Friday, January 30, 2026
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Ravidas Jayanti 2026: क्या है 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' का असली अर्थ? गुरु रविदास जी की जयंती पर पढ़ें उनके प्रेरक दोहे

Ravidas Jayanti 2026: हिंदू कैलेंडर अनुसार गुरु रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा के दिन उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि पर गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये तिथि 1 फरवरी 2026 को पड़ रही है।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Jan 30, 2026 02:18 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 02:20 pm IST
गुरु रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV गुरु रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे

Ravidas Jayanti 2026: गुरु रविदास जी एक महान भारतीय संत, कवि, समाज सुधारक और दार्शनिक थे। जिन्होंने अपने गीतों और कहावतों के जरिए भक्ति आन्दोलन पर एक स्थायी प्रभाव डाला था। गुरु रविदास जी ने समाज में भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समाज को समानता और मानवता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं, विचार और दोहे आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी शांति और समानता का मार्ग दिखाते हैं। 1 फरवरी 2026 को संत रविदास जी की जयंती मनाई जाएगी। ऐसे में आप देखेंगे उनके प्रसिद्ध दोहे।

संत रविदास जी के दोहे (Sant Ravidas Ji Ke Dohe)

1. मन चंगा तो कठौती में गंगा का अर्थ

अर्थ- जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके बुलाने पर मां गंगा भी एक कठौती (बर्तन) में आ जाती हैं।

2. ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन, पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन

अर्थ- किसी को सिर्फ इसलिए नहीं पूजना चाहिए क्योंकि वह किसी पूजनीय पद पर बैठा है। यदि व्यक्ति में उस पद के योग्य गुण ही नहीं हैं तो उसे नहीं पूजना चाहिए। इसकी जगह ऐसे व्यक्ति को पूजना सही है जो किसी ऊंचे पद पर तो नहीं है लेकिन बहुत गुणवान है।

3. मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेऊं सहज स्वरूप

अर्थ- निर्मल मन में ही भगवान वास करते हैं। अगर आपके मन में किसी के लिए बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है तो आपका मन ही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप है। ऐसे ही पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं।

4. रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच, नकर कूं नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच

अर्थ- कोई भी व्यक्ति किसी जाति में जन्म के कारण नीचा या छोटा नहीं होता है। किसी व्यक्ति को निम्न उसके कर्म बनाते हैं। इसलिए हमें सदैव अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। हमारे कर्म सदैव ऊंचे होने चाहिए।

5. रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम, सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम

अर्थ- जिस हृदय में दिन-रात बस राम के नाम का ही वास रहता है, ऐसा भक्त स्वयं राम के समान होता है। राम नाम की ऐसी माया है कि इसे दिन-रात जपने वाले साधक को न तो किसी के क्रोध से क्रोध आता है और न ही कभी काम भावना उस पर हावी होती है।

6. जनम जात मत पूछिए, का जात अरू पात। रैदास पूत सब प्रभु के, कोए नहिं जात कुजात॥

अर्थ- किसी की जाति नहीं पूछनी चाहिए क्योंकि संसार में कोई जाति−पाँति नहीं है। सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं। यहाँ कोई जाति, बुरी जाति नहीं है।

7. हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस, ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास

अर्थ- हीरे से बहुमूल्य हरी यानि कि भगवान हैं। उनको छोड़कर अन्य चीजों की आशा करने वालों को निश्चित ही नर्क प्राप्त होता है। इसलिए प्रभु की भक्ति को छोडकर इधर-उधर भटकना व्यर्थ है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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