Maghi Purnima 2026: माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को है और इस दिन रवि पुष्य नामक बेहद शुभ योग भी रहेगा। आपको बता दें कि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं और अधिष्ठाता देवता बृहस्पति इसलिए इस नक्षत्र को शुभ माना जाता है। वहीं जब रविवार के दिन यह नक्षत्र होता है तो इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है। माघ पूर्णिमा के दिन इस शुभ योग के बनने से दान-पुण्य के साथ ही कुछ अन्य उपाय करने से भी लाभ की प्राप्ति हो सकती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि माघ पूर्णिमा के दिन क्या काम करने से आपको किस्मत चमक सकती है और साथ ही माता लक्ष्मी का आशीर्वाद आपको मिल सकता है।
माघ पूर्णिमा और रवि पुष्य योग में करें ये कार्य
माता लक्ष्मी की करें पूजा- पूर्णिमा और रवि पुष्य योग में आपको माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। सूर्यास्त के बाद इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फलों की आपको प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान आपको माता लक्ष्मी के मंत्र 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करना चाहिए।
इन चीजों की खरीदारी करना शुभ- रवि पुष्य योग में कुछ चीजों की खरीदारी करने से आपको लाभ मिल सकता है। ये चीजें हैं- सोना, चांदी, इलेक्ट्रोनिक सामान, नया वाहन और जमीन। माना जाता है कि रवि पुष्य योग में इन चीजों को खरीदने से बरकत आती है।
सूर्य-चंद्र की करें उपासना- माघ पूर्णिमा के दिन रवि पुष्य योग है इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्रमा की उपासना करने से आपके जीवन के सभी दुख दूर हो सकते हैं। आपको करियर में सफलता मिल सकती है और बिगड़े काम भी बन सकते हैं।
इन चीजों का करें दान- माघ पूर्णिमा के दिन आपको रवि पुष्य नक्षत्र में दान करने से भी शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। इस दिन आपको गेहूं, गुड़, तिल, पीले रंग के भोज्य पदार्थ और पीले वस्त्र दान करने चाहिए। इन चीजों का दान करने से आपको देवी-देवताओं के साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
मंत्र सिद्धि- रवि पुष्य योग और माघ पूर्णिमा के शुभ संयोग में आप मंत्र सिद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन अपने इष्ट देव के मंत्र या फिर गायत्री मंत्र का जप करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मानसिक शांति भी आप प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही आप अन्य देवी-देवताओं के मंत्र भी इस दिन कर सकते हैं। हालांकि इस बात का ख्याल रखें कि माघ पूर्णिमा के दिन किसी भी मंत्र का जप शुरू करने के बाद आपको अगली पूर्णिमा तक हर दिन इस मंत्र का जप करना है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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