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Rajat Sharma's Blog | सुप्रीम आदेश: UGC क़ानून का दुरुपयोग न हो

UGC के नियमों में बदलाव को लेकर पिछले एक हफ्ते से लगातार देश भर में विरोध हो रहा था, सियासी बयानबाजी जारी थी, सुप्रीम कोर्ट की इस पर पूरी नजर थी।

Written By: Rajat Sharma @RajatSharmaLive
Published : Jan 30, 2026 01:16 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 01:16 pm IST
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Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नये नियमों पर रोक लगा दी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि इन नियमों के प्रावधानों से समाज में विभाजन की संभावना है और ये बहुत खतरनाक हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो इसके नतीजे बहुत गंभीर होंगे, इसलिए अदालत का इस मामले में हस्तक्षेप करना जरूरी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि प्रत्यक्ष दृष्टि से ये लग रहा है कि UGC नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है, इसका दुरुपयोग  हो सकता है, इसलिए सरकार को विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर इस पर फिर से विचार करना चाहिए।

UGC के नियमों में बदलाव को लेकर पिछले एक हफ्ते से लगातार देश भर में विरोध हो रहा था, सियासी बयानबाजी जारी थी, सुप्रीम कोर्ट की इस पर पूरी नजर थी। गुरुवार को जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने नियमों को ड्राफ्ट करने वालों की समझ पर सवाल उठाए। कोर्ट में सबसे ज़्यादा बात हुई UGC एक्ट की धारा 3-C और धारा 3-E पर। धारा 3E पहले से एक्ट में हैं। 3C में कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं, इन्हीं प्रावधानों का सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है क्योंकि इन्हीं में SC-ST और OBC के खिलाफ भेदभाव का ज़िक्र किया गया है। कोर्ट ने कहा कि जब भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई की बात धारा 3-E में पहले से शामिल थी तो फिर धारा 3-C लाने की क्या ज़रूरत थी?

सवर्ण समाज के वकील विष्णु जैन ने कहा कि एक्ट की धारा 3-C में सामान्य वर्ग के सदस्यों को पूरी तरह से बाहर रखा गया है। धारा 3-C संविधान में दिए गए समानता के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है, इस धारा के मुताबिक कानून पहले ही ये मान लेता है कि सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव नहीं होता, बल्कि वो भेदभाव करता है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने इस तर्क को सही माना। कोर्ट ने कहा कि अगर इस कानून को लेकर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता है तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे। कोर्ट ने कहा, प्रत्यक्षदृष्टया  ऐसा लगता है कि UGC एक्ट की भाषा अस्पष्ट है, इसमें संशोधन की जरूरत है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा कैसे माना जा सकता है कि सिर्फ जाति के आधार पर भेदभाव होता है। सवर्ण छात्रों के साथ अगर जन्म स्थान, लिंग या भाषा के आधार पर भेदभाव होता है, तो वह किससे शिकायत करेगा? इस एक्ट में तो इसका कोई प्रावधान नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने दुख जताते हुए कहा कि आज़ादी के बाद 75 साल में जिस देश ने समाज को समावेशी और वर्गमुक्त बनाने की लिए इतनी मेहनत की हो, क्या अब हम ऐसे फैसलों से प्रगतिशील बनने की बजाए एक प्रतिगामी समाज बन रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिका में श्वेत और अश्वेत लोगों के बच्चे अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे, उम्मीद है कि हमारे यहां ऐसा नहीं होगा। अदालत में समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता के उस बयान का ज़िक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सवर्णों के बच्चों को इस कानून के तहत फंसाया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पूर्वजों ने हज़ारों साल तक बहुजनों का शोषण किया है। कोर्ट को  JNU समेत देश की कई विश्वविद्यालयों में सवर्ण समाज के खिलाफ लगाये गये नारे भी सुनाए गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के अनुपालन पर रोक लगा दी। अब 19 मार्च को सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन छात्रों में खुशी है, जो पिछले एक हफ्ते से लगातार आंदोलन कर रहे थे। UGC एक्ट पर रोक लगने के बाद दिल्ली, लखनऊ, पटना में छात्रों ने जश्न मनाया। वाराणसी में BHU कैम्पस में इस कानून के खिलाफ पिछले तीन दिन से प्रदर्शन हो रहा है, छात्रों ने कक्षाओं का बहिश्कार कर रखा था। ये अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट  ने UGC Act में बदलाव को लेकर छात्रों की वेदना को समझा। कोई भी कानून बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उससे समाज में और विषमता ना फैले, लेकिन जो कानून समता के लिए बनाया गया, उसमें बांटने की क्षमता नजर आई।

अगर ऐसे कानून बने तो स्कूल और कॉलेज  भी जातियों के आधार पर बनेंगे। छात्र अगड़ों और पिछड़ों में और ज्यादा बंटेंगे। ज्यादातर राजनीतिक दलों को भी इस बात का एहसास हुआ। उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहत की सांस ली। UGC का नया नियम एकतरफा था। अब सुप्रीम कोर्ट  की सलाह पर जो कमेटी बनेगी वो इसकी गहराई में जाएगी तो और भी बातें सामने आएंगी। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 30 जनवरी, 2026 का पूरा एपिसोड

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