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Holi Ka Danda Kab Gadega 2026: माघ पूर्णिमा या होलाष्टक? किस दिन गाड़ा जाएगा होली का डांडा, क्या है इसका महत्व

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Jan 30, 2026 10:41 am IST,  Updated : Jan 30, 2026 10:42 am IST

Holi Ka Danda Kab Gadega 2026: होलिका दहन से कुछ दिन पहले होली का डांडा गाड़ा जाता है। यह एक बेहद ही प्राचीन परंपरा है जो होली पर्व की शुरुआत होने का संकेत देती है। यहां जानिए इस साल होली का डांडा कब रोपा जाएगा।

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होली का डांडा 2026 Image Source : PTI

Holi Ka Danda Kab Gadega 2026: होली का डांडा कहीं माघ पूर्णिमा के दिन गाड़ा जाता है तो कहीं होलाष्टक के पहले दिन इसका रोपण किया जाता है। इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को है तो वहीं होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से होगी। आप अपने यहां की परंपरा के अनुसार इनमें से किसी भी दिन होली का डांडा गाड़ सकते हैं। हालांकि अब अधिकांश जगहों पर होलिका दहन से एक दिन पहले ही ये काम किया जाने लगा है। चलिए आपको बताते हैं डांडा रोपण क्या होता है और इसका महत्व क्या है।

होली का डांडा कब रोपा जाएगा 2026 (Holi Ka Danda Kab Gadega 2026)

  • 1 फरवरी 2026 - जो लोग माघ पूर्णिमा के दिन होली का डांडा रोपते हैं वो 1 फरवरी को ये शुभ काम करेंगे।
  • 24 फरवरी 2026 - जो लोग होलाष्टक की शुरुआत में होली का डांडा रोपते हैं वो 24 फरवरी को ये काम करेंगे।
  • 2 मार्च 2026 - जहां होलिका दहन से एक दिन पहले डांडा रोपण का काम किया जाता है। वहां ये शुभ काम 2 मार्च को किया जाएगा। 

होली का डांडा क्या होता है? (Holi Ka Danda Kya Hota Hai)

होली के उत्सव की शुरुआत डांडा रोपण के साथ होती है। डांडा का अर्थ है एक लकड़ी या स्तंभ। जिस स्थान पर होलिका दहन किया जाता है उस जगह पर कुछ दिन पहले एक लकड़ी रोपी जाती है जिसे होली का डांडा कहते हैं। फिर इसके चारों तरफ लोग लकड़ियां, उपले और सूखे पत्ते इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं जिससे होलिका का ढेर बन जाता है। फिर इस ढेर को होलिका दहन के दिन शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। लेकिन होलिका जलाने से पहले डांडे को निकाल लिया जाता है क्योंकि इस डांडे को भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है। कई जगहों पर लोग दो डांडा भी रोपते हैं। जिनमें से एक को प्रहलाद का प्रतीक तो दूसरे को होलिका का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन के समय प्रहलाद के प्रतीक डांडे को निकाल लिया जाता है और होलिका के डांडे को जलने दिया जाता है।  

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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