क्या आप जानते हैं कि हर साल जनवरी में ग्लूकोमा जागरूकता माह यानी ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ मनाया जाता है? अगर आपने इस गंभीर बीमारी के लक्षणों को समय रहते नहीं पहचाना, तो यही बीमारी आपको अंधेपन का शिकार बना सकती है। आज हम आपको ग्लूकोमा के लक्षणों और बचाव के कुछ तरीकों के बारे में भी बताएंगे। लेकिन ये जानने से पहले आपको ये पता होना चाहिए कि इस गंभीर बीमारी की वजह से शरीर के किस अंग को नुकसान पहुंच सकता है।
आंखों के लिए हानिकारक- ग्लूकोमा यानी काला मोतिया आंखों की सेहत को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्लूकोमा से ऑप्टिक नर्व यानी आंख को ब्रेन से जोड़ने वाली नर्व पर असर पड़ता है। इस वजह से आंख के अंदर दबाव बढ़ने लगता है। अगर समय रहते ग्लूकोमा का ट्रीटमेंट शुरू नहीं हुआ, तो ऑप्टिक नर्व पूरी तरह से डैमेज हो सकती है और मरीज अंधा भी हो सकता है।
कैसे कर सकते हैं बचाव- ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ चल रहा है, तो आपको ग्लूकोमा से बचाव करने के तरीके के बारे में भी जान लेना चाहिए। आपको रेगुलरली अपनी आंखों की जांच करवानी चाहिए। आंखों की सेहत को मजबूत बनाए रखने के लिए हेल्दी डाइट प्लान को फॉलो करना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह लेकर रोजाना कुछ ऐसी एक्सरसाइज करें जो आंखों की सेहत को मजबूत बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती हैं। जितनी जल्दी ग्लूकोमा को डिटेक्ट किया जाएगा, आपकी आंखों को उतना ही कम नुकसान पहुंचेगा।
किन लक्षणों को हल्के में न लें- धीरे-धीरे आंखों के साइड से दिखना कम हो सकता है और दृष्टि में धब्बे बन सकते हैं, ऐसे लक्षण काला मोतिया के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। जैसे बीमारी गंभीर होती जाएगी, वैसे ही आंखों में तेज दर्द, सिर में तेज दर्द, धुंधलापन, मतली, उल्टी और रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी छल्ले दिखना, इस तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
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डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।