Sunday, January 25, 2026
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जीरो मेंटेनेंस फीस, न कोई खर्च... उल्टा अकाउंट में आते हैं ₹2.5 लाख; इस सोसायटी के फ्लैट मालिकों की मौज-ही-मौज!

सपनों की नगरी मुंबई में जहां एक छोटा सा घर खरीदना आम आदमी के लिए बड़ी जंग बन चुका है, वहीं हर महीने का मेंटेनेंस चार्ज भी जेब पर भारी पड़ता है। खासकर साउथ मुंबई जैसे इलाकों में मेंटेनेंस के नाम पर हजारों रुपये खर्च करना आम बात है। लेकिन इस एक हाउसिंग सोसाइटी ने पूरी सोच को पलट दिया है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Jan 25, 2026 11:58 am IST, Updated : Jan 25, 2026 11:58 am IST
साउथ मुंबई स्थित जॉली...- India TV Paisa
Photo:OFFICIAL WEBSITE साउथ मुंबई स्थित जॉली मेकर सोसायटी

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े-बड़े में रहने वाले ज्यादातर फ्लैट मालिक हर महीने बढ़ते मेंटेनेंस चार्ज से परेशान रहते हैं। लिफ्ट, सुरक्षा, पार्किंग, बिजली और सफाई इन सबके नाम पर हजारों रुपये हर महीने सोसायटी को देने पड़ते हैं। लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि देश में एक ऐसी हाउसिंग सोसायटी है जहां न तो मेंटेनेंस चार्ज देना पड़ता है और न ही कोई एक्स्ट्रा खर्च, बल्कि साल के अंत में फ्लैट मालिकों के खाते में 2.5 लाख रुपये तक की रकम आ जाती है, तो शायद यकीन करना मुश्किल हो। लेकिन यही हकीकत है साउथ मुंबई में स्थित जॉली मेकर सोसायटी की, जिसने हाउसिंग मॉडल की सोच ही बदल दी है।

साउथ मुंबई की पॉश सोसायटी का अनोखा मॉडल

दक्षिण मुंबई की जॉली मेकर (Jolly Maker) टावर इन दिनों चर्चा में है। वजह है इसका ऐसा बिजनेस मॉडल, जिसमें फ्लैट मालिकों को सालाना करीब 2.5 लाख रुपये की एक्स्ट्रा कमाई होती है। इस अनोखी व्यवस्था को हाल ही में पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो के जरिए बताया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। हजारों लोग इस मॉडल को देखकर हैरान रह गए।

यहां ‘मेंटेनेंस चार्ज’ शब्द ही नहीं

जहां कफ परेड, नरीमन पॉइंट जैसे इलाकों में हर महीने भारी मेंटेनेंस देना पड़ता है, वहीं जॉली मेकर टावर में मेंटेनेंस चार्ज जैसा कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट, स्टाफ और अन्य सभी खर्च सोसायटी खुद उठाती है। इतना ही नहीं, साल के अंत में फ्लैट मालिकों को मुनाफा भी दिया जाता है।

1970 के दशक में रखी गई थी नींव

इस अनोखे मॉडल की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। उस समय बिल्डर ने फ्लैट बेचते वक्त एक खास शर्त रखी थी कि फ्लैट खरीदने के साथ-साथ नरीमन पॉइंट स्थित एक कमर्शियल बिल्डिंग में भी हिस्सेदारी लेनी होगी। तब यह शर्त लोगों को एक्स्ट्रा बोझ लग रही थी, लेकिन आज वही फैसला सोने पर सुहागा साबित हो रहा है।

किराए से चलता है पूरा सिस्टम

नरीमन पॉइंट की उस कमर्शियल बिल्डिंग से आज करीब 50 लाख रुपये महीना किराया आता है। यह रकम सीधे जॉली मेकर सोसायटी के खाते में जाती है। इसी पैसे से पूरे मेंटेनेंस का खर्च निकाला जाता है और जो राशि बचती है, वह सभी फ्लैट मालिकों में बांट दी जाती है।

घर नहीं, मुनाफे का सौदा

जॉली मेकर टावर में घर होना सिर्फ रहने की सुविधा नहीं, बल्कि एक स्मार्ट निवेश है। यहां फ्लैट मालिकों को न खर्च की चिंता है और न मेंटेनेंस का झंझट। उल्टा हर साल लाखों रुपये की कमाई इस सोसायटी को मुंबई की सबसे अनोखी और चर्चित हाउसिंग सोसायटी बना देती है।

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