Friday, January 23, 2026
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Stock Market Highlights: शेयर मार्केट में भूचाल, सेंसेक्स 770 अंक टूटा, निफ्टी भी पस्त, क्यों लुढ़का बाजार?

विदेशी निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है। आज भारतीय रुपया नया ऑल-टाइम लो छूने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई, जिसका असर शेयर बाजार पर साफ़ तौर पर देखने को मिला।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 23, 2026 03:48 pm IST, Updated : Jan 23, 2026 04:07 pm IST
सेक्टोरल फ्रंट पर सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।- India TV Paisa
Photo:PTI सेक्टोरल फ्रंट पर सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक शुक्रवार, 23 जनवरी को भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के आखिर में निफ्टी 25,100 के नीचे फिसल गया। बंद होते समय सेंसेक्स 769.67 अंक या 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,537.70 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 241.25 अंक या 0.95 प्रतिशत टूटकर 25,048.65 पर आ गया। आज के कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से ज्यादातर शेयर लाल निशान पर बंद हुए। सबसे ज्यादा बिकवाली अदानी पोर्ट्स, इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक और पावर ग्रिड के स्टॉक में देखने को मिली है।

निफ्टी के प्रमुख नुकसान वाले शेयर

शेयर बाजार में आज बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निफ्टी के प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन और सिप्ला शामिल रहे। वहीं, डॉ. रेड्डीज लैब्स, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, हिंडाल्को और एचयूएल बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टोरल फ्रंट पर सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कैपिटल गुड्स, पावर, रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.5 प्रतिशत टूटा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

बीएसई सेंसेक्स में शामिल प्रमुख कंपनियों का शुक्रवार को प्रदर्शन।

Image Source : BSE
बीएसई सेंसेक्स में शामिल प्रमुख कंपनियों का शुक्रवार को प्रदर्शन।

बाजार में किस वजह से आई गिरावट?

लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव कम होने के संकेत भले ही मिल रहे हों, लेकिन अमेरिका और नाटो के बीच कथित “डील” को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसी अनिश्चितता के चलते बाजार के प्रतिभागी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को दावा किया कि नाटो के साथ हुए एक समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड तक स्थायी और पूर्ण पहुंच मिल गई है। हालांकि, इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि न होने से निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं।

भारतीय मुद्रा का कमजोर होना
भारतीय रुपया शुक्रवार को इंट्रा-डे कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया, जिससे बाजार की धारणा को जोरदार झटका लगा। घरेलू शेयर बाजार में हाल के दिनों में बनी निराशा के पीछे रुपये की कमजोरी एक अहम वजह मानी जा रही है। पिछले साल करीब 5 प्रतिशत की गिरावट के बाद, चालू वर्ष में अब तक रुपया 2 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

एफआईआई की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार जारी बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव है। एफआईआई की इस आक्रामक बिक्री ने बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। अब तक जनवरी महीने में एफआईआई कैश सेगमेंट में 36,500 करोड़ रुपये से अधिक के भारतीय शेयर बेच चुके हैं, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है और बाजार में गिरावट का माहौल बना हुआ है।

बजट से पहले बाजार में सतर्कता
केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। निवेशकों को बजट से विकास को प्रोत्साहित करने वाले और निवेशक-हितैषी कदमों की उम्मीद है, हालांकि किसी भी अप्रत्याशित फैसले को लेकर फिलहाल वे संभलकर कदम रख रहे हैं। बाजार के जानकारों को भरोसा है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजीगत निवेश बढ़ाने, रोज़गार सृजन को गति देने और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स के युक्तिकरण जैसे उपायों के ज़रिये आर्थिक विकास को मजबूती देगी और निवेश माहौल को बेहतर बनाएगी।

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