अमेरिका को फिर से महान बनाने का दावा करने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्होंने सत्ता का इस्तेमाल देश के लिए ज्यादा किया या अपने परिवार के बिजनेस के लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद सिर्फ एक साल में ट्रंप की निजी संपत्ति में कम से कम 12,800 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि असली कमाई इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई सौदे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
हाल ही में दावोस में ट्रंप ने दावा किया कि उनकी नीतियों और टैरिफ फैसलों के चलते अमेरिका में करीब 16.48 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। हालांकि NYT का कहना है कि टैरिफ वॉर का सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा, जबकि इसका फायदा ट्रंप और उनके परिवार को मिला। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति पद की ताकत का इस्तेमाल कर ट्रंप ने विदेशी सरकारों और कंपनियों से ऐसे सौदे किए, जिनसे उनके निजी कारोबार को सीधा लाभ हुआ।
भारत बना बड़ा बाजार
ट्रंप की कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से आया है। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन इस समय 20 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से जुड़ा हुआ है। भारत में ही ट्रंप-ब्रांडेड आठ प्रोजेक्ट्स या तो चल रहे हैं या योजना के चरण में हैं। इनमें रेसिडेंशियल टावर, होटल और कमर्शियल स्पेस शामिल हैं। पुणे में बन रहा ट्रंप वर्ल्ड सेंटर भारत का पहला ट्रंप-ब्रांडेड कमर्शियल प्रोजेक्ट है, जिससे करीब 289 मिलियन डॉलर की कमाई का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके अलावा गुरुग्राम में भी रेसिडेंशियल और होटल प्रोजेक्ट्स सूचीबद्ध हैं।
टैरिफ के बदले प्रोजेक्ट
रिपोर्ट में वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों का भी जिक्र है, जहां टैरिफ में ढील के बदले ट्रंप ऑर्गनाइजेशन को बड़े गोल्फ और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की मंजूरी मिली। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी ट्रंप परिवार की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। ट्रंप से जुड़ी कंपनियों और मीम कॉइन से सैकड़ों मिलियन डॉलर की आमदनी हुई है।
गिफ्ट, चंदा और सेटलमेंट
इसके अलावा फिल्म, टेक और मीडिया कंपनियों से हुए सेटलमेंट, चुनाव के बाद जुटाया गया भारी चंदा और लग्जरी गिफ्ट्स भी ट्रंप की संपत्ति में शामिल हैं। NYT के मुताबिक, जब एक औसत अमेरिकी परिवार साल में करीब 83,000 डॉलर कमाता है, तब ट्रंप की एक साल की कमाई इससे हजारों गुना ज्यादा है। यही वजह है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को लेकर यह बहस तेज हो गई है कि सत्ता अब सार्वजनिक सेवा नहीं, बल्कि एक बड़ा बिजनेस मॉडल बनती जा रही है।






































