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रिलायंस ने किया रूसी तेल से किनारा, सरकारी कंपनियों ने जमकर की खरीदारी, समझें पूरी बात

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Jan 26, 2026 02:48 pm IST,  Updated : Jan 26, 2026 02:48 pm IST

मौजूदा समय में रूस का कच्चा तेल अब लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है। जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूस से तेल आयात दिसंबर के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है।

जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।- India TV Hindi
जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। Image Source : FREEPIK

जनवरी 2026 में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने रूस से एक भी बैरल कच्चा तेल नहीं खरीदा, जबकि सरकारी तेल कंपनियों ने भारी छूट का फायदा उठाते हुए अपने आयात को बढ़ाया। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, रूस का कच्चा तेल अब लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल सस्ता उपलब्ध हो रहा है, जो 2025 के मध्य स्तर से लगभग तीन गुना अधिक है। रिलायंस, जो 2025 में करीब 6 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा रूसी तेल खरीदार था, जनवरी के पहले तीन हफ्तों में खरीद से पूरी तरह दूर रही। HPCL-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL), मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और HPCL ने भी जनवरी में रूसी तेल नहीं खरीदा।

सरकारी कंपनियों ने बढ़ाया आयात

सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों-इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने जनवरी में औसतन 4.7 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। दिसंबर में यह संख्या 4.27 लाख बैरल प्रतिदिन थी। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने भी जनवरी में 1.64 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा, जो दिसंबर के 1.43 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक है।

नायरा एनर्जी की रूस पर निर्भरता

रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी ने रूस से लगातार कच्चा तेल खरीदा और जनवरी में करीब 4.69 लाख बैरल प्रतिदिन आयात किया। यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण नायरा की रूस पर निर्भरता और बढ़ गई है।

कुल आयात में गिरावट

जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि दिसंबर में यह 12 लाख बैरल प्रतिदिन था। ये दोनों आंकड़े नवंबर के 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन से काफी कम हैं। इसका मुख्य कारण 21 नवंबर से लागू अमेरिकी प्रतिबंध हैं, जो रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी बड़ी रूसी कंपनियों पर लगाए गए।

आगे का रुझान

डेटा फर्म Kpler के विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत का औसत रूसी तेल आयात लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन और Q1 2026 में 13–15 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच रहने की उम्मीद है। जनवरी में नायरा, BPCL और IOC ने नए कार्गो खरीदे, जबकि रिलायंस, MRPL और HMEL अभी खरीद से दूर हैं।

सप्लाई चैन में बदलाव

भारतीय रिफाइनर अब रूसी तेल के लिए नए, गैर-प्रतिबंधित बिचौलियों के जरिए सौदे कर रहे हैं। सीधे डिलीवरी अभी भी रोसनेफ्ट और लुकोइल से हो रही है, लेकिन यह मुख्य रूप से नायरा एनर्जी तक सीमित है। जनवरी में रोसनेफ्ट ने 1.30 लाख बैरल प्रतिदिन और लुकोइल ने 1.03 लाख बैरल प्रतिदिन तेल सप्लाई किया, जबकि बाकी तेल सर्गुटनेफ्टेगैस और रुसएक्सपोर्ट जैसे गैर-प्रतिबंधित स्रोतों से आया।

विश्लेषकों के अनुसार, प्रतिबंधों के बावजूद नायरा एनर्जी अपनी रिफाइनरी 90–100% क्षमता पर चला रही है। कंपनी घरेलू बाजार में ईंधन की सप्लाई कर रही है और समुद्री मार्ग से कुछ उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भेजे जा रहे हैं।

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