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Share Market Crash: बजट में निर्मला सीतारमण के इस ऐलान की वजह से बर्बाद हुआ बाजार- जानें क्रैश के प्रमुख कारण

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Feb 01, 2026 04:28 pm IST,  Updated : Feb 01, 2026 04:28 pm IST

रविवार को बीएसई सेंसेक्स 1546.84 अंकों (1.88 प्रतिशत) की भारी गिरावट के साथ 80,722.94 अंकों पर बंद हुआ।

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बजट में निर्मला सीतारमण के इस ऐलान की वजह से बर्बाद हुआ बाजार Image Source : FREEPIK

Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में आज विनाशकारी गिरावट देखने को मिली। रविवार को बीएसई सेंसेक्स 1546.84 अंकों (1.88 प्रतिशत) की भारी गिरावट के साथ 80,722.94 अंकों पर बंद हुआ। जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 495.20 अंकों (1.96%) के नुकसान के साथ 24,825.45 अंकों पर बंद हुआ। बजट के दिन हरे निशान में खुला बाजार बजट भाषण शुरू होने के बाद कुछ देर के लिए तेजी से बढ़ा था, लेकिन जब इसमें गिरावट आनी शुरू हुई तो इसने निवेशकों को खून के आंसू रुला दिया। India TV ने आज की इस गिरावट का कारण जानने के लिए जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट कुणाल सरावगी से बातचीत की। कुणाल सरावगी ने बताया कि आज बजट के मौके पर बाजार क्रैश होने के दो प्रमुख कारण रहे।

कारण 1

कुणाल सरावगी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर एंड ऑप्शन्स ट्रेडिंग के लिए वसूले जाने वाले STT (सिक्यॉरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद मार्केट में बिकवाली शुरू हुई और ये तेजी से गहरी होती चली गई। वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शन्स प्रीमियम पर 0.10% से बढ़ाकर 0.15% करने का ऐलान किया था। शेयर बाजार निवेशकों को वित्त मंत्री की ये घोषणा बिल्कुल पसंद नहीं आई और उन्होंने ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू कर दी।

कारण 2

मार्केट एक्सपर्ट कुणाल सरावगी ने मार्केट क्रैश होने का दूसरा प्रमुख कारण LTCG टैक्स पर कोई बड़ा फैसला न होने को बताया। दरअसल, निवेशकों की मांग थी कि सरकार LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स) टैक्स पर सरकार को राहत देनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने निवेशकों को LTCG टैक्स पर कोई राहत नहीं दी। लिहाजा, निवेशकों ने शेयर बाजार में अपने शेयर बेचकर पैसा निकालना शुरू कर दिया। 

अभी कितना LTCG टैक्स वसूल रही है सरकार

बताते चलें कि लिस्टेड इक्विटी शेयरों और एक्विटी म्यूचुअल फंड 12 महीने से ज्यादा के होल्डिंग पीरियड के साथ LTCG टैक्स के दायरे में आते हैं। जबकि, गोल्ड ईटीएफ और अनलिस्टेड शेयर 24 महीने से ज्यादा के होल्डिंग पीरियड के साथ LTCG टैक्स के दायरे में आते हैं। बताते चलें कि सरकार अभी इक्विटी शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और ईटीएफ पर 12.5 प्रतिशत का भारी-भरकम LTCG टैक्स वसूल रही है, जिसमें निवेशक राहत की मांग कर रहे थे।

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