घरेलू मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज बिकवाली के बाद कारोबारी और निवेशक इन कीमती धातुओं की चाल पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। खासकर चांदी में 1980 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है। 1 फरवरी 2026 को बजट 2026 के पेश होने के चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर विशेष रविवार सत्र में कारोबार हो रहा है। ऐसे में निवेशकों की दिलचस्पी इस बात पर टिकी है कि बजट डे पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी किस दिशा में रुख करते हैं और क्या कीमतों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।
रिकॉर्ड लेवल से फिसली कीमतें
जनवरी के आखिरी सप्ताह तक सोना और चांदी दोनों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी और एमसीएक्स पर दोनों धातुएं अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि 30 जनवरी को यह तेजी अचानक थम गई। चांदी की कीमत में एक ही सत्र में करीब 30 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो दशकों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। वहीं सोने की कीमतों में भी पिछले दस वर्षों की सबसे तेज़ एकदिनी गिरावट देखने को मिली। एक दिन पहले तक जो भाव रिकॉर्ड के बेहद करीब थे, वे अचानक टूट गए। इसका नतीजा यह हुआ कि चांदी की कीमत गिरकर करीब 2.9 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई, जबकि सोना लगभग 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।
आखिर क्यों गिरे दाम?
सोना और चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई अहम वजहें रहीं। जबरदस्त उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली करते हुए बिकवाली की। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं की मांग कमजोर पड़ी। विदेशी एक्सचेंजों द्वारा ट्रेडिंग मार्जिन बढ़ाए जाने के चलते ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन घटानी पड़ी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना। कुल मिलाकर, इन सभी वजहों से सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट आई।






































