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Sri Lanka, Pakistan, Bangladesh: ईंधन संकट से बेहाल हुए भारत के पड़ोसी देश! कहीं 4-डे वर्किंग वीक तो कहीं स्कूल बंद, पाक ने उठाए चौंकाने वाले कदम

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 18, 2026 02:37 pm IST,  Updated : Mar 18, 2026 02:37 pm IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर अब सीधे उन देशों पर दिख रहा है जो ईंधन के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तानइस समय गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं।

भारत के पड़ोसी देशों...- India TV Hindi
भारत के पड़ोसी देशों में ईंधन संकट Image Source : CANVA

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई में आई रुकावट का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। खासतौर पर भारत के पड़ोसी देश जैसे श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश ईंधन संकट से जूझ रहे हैं। तेल की कीमतों में तेजी, सप्लाई में देरी और बढ़ते खर्च ने इन देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।

श्रीलंका में 4 दिन का वर्किंग वीक

आर्थिक संकट से उबर रहे श्रीलंका ने ईंधन बचाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 4 दिन का वर्किंग वीक लागू किया है, ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो सके। इसके अलावा QR कोड आधारित राशनिंग सिस्टम भी लागू है, जिससे हर वाहन को सीमित मात्रा में ही ईंधन मिल रहा है। सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि निजी वाहनों पर कंट्रोल बढ़ाया गया है।

बांग्लादेश में सख्त नियम

बांग्लादेश ने खर्च कम करने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। सरकारी दफ्तरों के काम के घंटे घटा दिए गए हैं और एयर कंडीशनिंग के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। गैर-जरूरी विदेशी दौरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। डीजल से चलने वाले पावर प्लांट्स की क्षमता भी कम कर दी गई है, जिससे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई जा रही है।

पाकिस्तान के चौंकाने वाले फैसले

पाकिस्तान ने भी इस संकट से निपटने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान डे पर होने वाली परेड और बड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन आपूर्ति रोक दी गई है और पेट्रोल-डीजल अलाउंस में 50% तक कटौती की गई है। इतना ही नहीं, कई जगहों पर स्कूल-कॉलेज बंद किए गए हैं और सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी टाल दिया गया है, ताकि संसाधनों की बचत की जा सके।

क्यों बढ़ा संकट?

तेल सप्लाई के अहम रास्तों में बाधा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे ईंधन आयात करने वाले देशों की लागत बढ़ गई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चला, तो इन देशों में महंगाई और बढ़ सकती है और आम जनता पर असर और गहरा होगा। फिलहाल सरकारें सख्त फैसले लेकर हालात संभालने की कोशिश कर रही हैं।

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