बजट से पहले जिस राहत की उम्मीद लाखों रिटायरमेंट प्लान करने वाले निवेशक कर रहे थे, उस पर बजट 2026 ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। गैर-सरकारी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) सब्सक्राइबर्स को उम्मीद थी कि सरकार टैक्स-फ्री लंपसम निकासी की सीमा 60% से बढ़ाकर 80% कर देगी। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इस दिशा में कोई ऐलान नहीं किया। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ अफवाह थी या राहत अभी टली है?
क्या बदला और क्या नहीं?
दिसंबर 2025 में पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने गैर-सरकारी NPS निवेशकों के लिए लंपसम निकासी की अधिकतम सीमा 60% से बढ़ाकर 80% जरूर कर दी थी। लेकिन टैक्स नियमों में बदलाव न होने की वजह से फिलहाल केवल 60% राशि ही टैक्स-फ्री है। बाकी 20% रकम पर टैक्स का बोझ बना हुआ है या उसे एन्युटी में लगाना अनिवार्य है।
बजट 2026 से क्यों टूटी उम्मीद?
निवेशकों को उम्मीद थी कि बजट 2026 में आयकर कानून में संशोधन कर 80% लंपसम को भी टैक्स-फ्री कर दिया जाएगा। हालांकि, वित्त मंत्री ने इस पर कोई घोषणा नहीं की। अब निगाहें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट पर टिकी हैं कि क्या आगे चलकर कोई सर्कुलर जारी किया जाएगा।
टैक्स का असर कितना पड़ेगा?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि NPS पर लगने वाला टैक्स हर निवेशक के लिए एक जैसा नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति रिटायरमेंट के साल में कोई दूसरी कमाई नहीं कर रहा है, तो उस पर टैक्स का बोझ ज्यादा नहीं पड़ेगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी गैर-सरकारी NPS निवेशक का कुल फंड 2.5 करोड़ रुपये है, तो उसका 20% यानी करीब 50 लाख रुपये टैक्स के दायरे में आएगा। इस रकम पर टैक्स सरकार के तय इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगेगा।
80% टैक्स-फ्री होता तो क्या फायदा?
मान लीजिए किसी निवेशक का रिटायरमेंट कॉर्पस 10 लाख रुपये है। मौजूदा नियमों में 60% यानी 6 लाख रुपये टैक्स-फ्री मिलते हैं और 40% एन्युटी में जाते हैं। अगर 80% टैक्स-फ्री होता, तो 8 लाख रुपये तुरंत बिना टैक्स मिल जाते और केवल 20% एन्युटी में जाते। इससे निवेशक को ज्यादा लिक्विडिटी और बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग का मौका मिलता।



































