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Chaitra Navratri 2026 Story: चैत्र नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? कैसे हुई इसकी शुरुआत, यहां पढ़िए पौराणिक कथा और मान्यताएं

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 18, 2026 09:59 pm IST,  Updated : Mar 18, 2026 10:06 pm IST

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान माता रानी के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

चैत्र नवरात्रि 2026- India TV Hindi
चैत्र नवरात्रि 2026 Image Source : PEXELS

Chaitra Navratri 2026 (चैत्र नवरात्रि क्यों मनाई जाती है): चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ व्रत ही व्रत भी किया जाता है। चैत्र नवरात्रि में भगवती की उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति के साथ ही सभी मनोकामनाओं की भी पूर्ति होती है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ ही अखंड ज्योत भी जलाई जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर देवी मां की कृपा भी बरसती है। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि के दिन राम नवमी का त्यौहार भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन ही प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। तो चलिए अब जानते हैं कि आखिर चैत्र नवरात्रि की पौराणिक कथा क्या है।

चैत्र नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस का आतंक पृथ्वी लोक पर काफी अधिक बढ़ गया था। महिषासुर को वरदान था कि उसे कोई देव या दानव नहीं हरा पाएगा। महिषासुर के आतंक से चारों तरफ त्राहिमाम-त्राहिमाम मचा हुआ था। इसके बाद सभी देवताओं ने माता पार्वती से उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना किया। तब देवी पार्वती ने अपने अंश से नौ रूप प्रकट किए, जिन्हें देवताओं ने अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ये पूरी प्रक्रिया चैत्र माह के प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर पूरे 9 दिनों तक चला था। इसके बाद से चैत्र महीने में नवरात्रि मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। चैत्र नवरात्रि आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाली मानी जाती है। 

नवरात्रि के किस दिन कौनसी देवी की पूजा होती है?

पुराणों में एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्रों का जिक्र किया गया है, लेकिन चैत्र और अश्विन महीने के नवरात्रों को ही प्रमुखता से मनाया जाता है। बाकी दो नवरात्रों को तंत्र-मंत्र की साधना हेतु करने का विधान है, इसलिए इनका आम लोगों के जीवन में कोई महत्व नहीं है। महाशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों- पहला-शैलपुत्री, दूसरा-ब्रह्मचारिणी, तीसरा- चंद्रघंटा, चौथा-कूष्मांडा, पांचवां- स्कंदमाता, छठा-कात्यायनी, सातवां-कालरात्रि, आठवां-महागौरी और नौवां-सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा की संज्ञा दी गई है। नवरात्र के आखिरी दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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