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सरकारी बैंकों में FDI बढ़ाकर 49% करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा वित्त मंत्रालय, जानें मौजूदा लिमिट है कितनी?

 Published : Feb 02, 2026 03:49 pm IST,  Updated : Feb 02, 2026 03:50 pm IST

किसी बैंक में एफडीआई बढ़ाने का मतलब है विदेशी निवेश को बढ़ावा देना ताकि बैंक मजबूत हों, लेकिन साथ ही सरकारी नियंत्रण संतुलित बना रहे।

वित्त मंत्री के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।- India TV Hindi
वित्त मंत्री के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। Image Source : PTI

वित्त मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (सरकारी बैंक) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इस कदम का उद्देश्य बैंकों की पूंजी स्थिति को मजबूत करना और उन्हें भविष्य की वित्तीय जरूरतों के लिए अधिक सक्षम बनाना है। वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने बताया कि इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न मंत्रालयों के बीच परामर्श प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि हम अभी इस विषय पर विचार कर रहे हैं और एफडीआई सीमा को 49 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए अंतर-मंत्रालयी चर्चा चल रही है।

मौजूदा समय में कितनी है लिमिट?

खबर के मुताबिक, फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत निर्धारित है, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों में यह सीमा 74 प्रतिशत तक है। निजी बैंकों में 49 प्रतिशत तक एफडीआई स्वचालित मार्ग के तहत अनुमत है, जबकि 49 प्रतिशत से अधिक और 74 प्रतिशत तक के निवेश के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है।

कुछ बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी का प्रतिशत घटा 

केंद्र सरकार की हिस्सेदारी पर स्पष्ट करते हुए नागराजू ने कहा कि वर्ष 2020 के बाद से 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार के पास मौजूद शेयरों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि, बैंकों द्वारा पूंजी जुटाने के लिए नए शेयर जारी किए जाने के चलते कुछ बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी का प्रतिशत घटा है। आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश को लेकर उन्होंने बताया कि इसके लिए वित्तीय बोलियां इस महीने या अगले महीने आमंत्रित की जा सकती हैं।

बड़े बैंकों की भूमिका पर जोर देते हुए वित्तीय सेवा सचिव ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मौजूदा और भविष्य के आकार को देखते हुए देश को 3 से 4 बड़े बैंकों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे जैसे विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए 3–4 मजबूत बड़े बैंक होना जरूरी है।

बैंक में एफडीआई (FDI) बढ़ाने का मतलब 

किसी बैंक में एफडीआई बढ़ाने का तात्पर्य यह है कि उस बैंक में विदेशी निवेशकों को अधिक हिस्सेदारी (शेयर) खरीदने की अनुमति देना। इसे सरल शब्दों में ऐसे समझें कि जब सरकार किसी बैंक में एफडीआई की सीमा बढ़ाती है, तो विदेशी कंपनियां, विदेशी बैंक या विदेशी निवेशक उस बैंक के ज्यादा शेयर खरीद सकते हैं।

उदाहरण के लिए अभी अगर किसी सरकारी बैंक में एफडीआई सीमा 20% है, तो विदेशी निवेशक मिलकर अधिकतम 20% शेयर ही खरीद सकते हैं। अगर यह सीमा 49% कर दी जाती है, तो वे लगभग आधे बैंक तक की हिस्सेदारी खरीद सकेंगे।

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