Viral Video : सोशल मीडिया की लत ने एक बार फिर एक परिवार को तोड़ने की कगार पर पहुंचा दिया है। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी पर एक पति ने अपनी जीवित पत्नी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार और पिंडदान कर दिया। पत्नी के इंस्टाग्राम रील्स बनाने की आदत से तंग आकर किए गए इस अनोखे और विवादास्पद कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान और आक्रोशित हैं। वीडियो में दिख रहा है कि वह व्यक्ति नदी में पिंडदान कर रहा है जो कि एक पवित्र हिंदू अनुष्ठान है और आमतौर पर मृतकों के लिए किया जाता है। गुस्से के भयावह प्रदर्शन में, वह अपनी पत्नी की माला से सजी तस्वीर पर थूकता है और फिर उसे पानी में फेंक देता है, यह कहते हुए कि वह हमेशा के लिए उसके लिए "मृत" हो गई है।
एक्स पर शेयर किय गया वीडियो
इस वीडियो को एक्स पर @gharkakalesh नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें पति गंगा नदी में खड़े दिख रहे हैं। उनके हाथ में पत्नी की फूलों से सजी तस्वीर है। उन्होंने फोटो पर थूकते हुए कहा, “मेरे लिए यह औरत मर चुकी है।” इसके बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पिंडदान किया और पत्नी की तस्वीर व अन्य सामान गंगा में विसर्जित कर दिया। पति का आरोप है कि पत्नी लगातार भड़काऊ और आपत्तिजनक रील्स बनाती थी। बार-बार समझाने और मना करने के बावजूद जब वह नहीं मानी, तो उसने यह कदम उठाया।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
कुछ लोग इसे सार्वजनिक अपमान से पागल हुए आदमी की हरकत मानते हैं, वहीं कुछ इसे प्राचीन परंपराओं का घिनौना मजाक समझते हैं। एक यूजर ने लिखा, 'इससे पता चलता है कि पत्नी ने कितना जहर और वायरस फैलाया होगा कि एक आदमी इस हद तक गिर गया। भारतीय न्यायपालिका, कृपया अपनी आंखें खोलें। सच्चाई से मुंह न मोड़ें।' दूसरे यूजर ने कहा, 'और फिर भी उसने हमारे देखने के लिए एक रील बना दी। पति ने पत्नी की रील का विरोध करने के लिए सबसे घटिया रील बना दी।' तीसरे यूजर ने लिखा, 'हिंदू परंपरा में पिंडदान एक पवित्र अनुष्ठान है… इन लोगों ने हमारी संस्कृति में इतनी पवित्र, अर्थपूर्ण और गहरी चीज का मजाक उड़ाया है।' वहीं दूसरे ने कहा, 'पति एक कुपोषित मसखरा है। यह रील ही बेमानी है… पत्नी का यह अभिनय किसी तरह अपनी कुंठा निकालने का जरिया लगता है।' एक और यूजर ने लिखा कि, 'एक और मंदबुद्धि व्यक्ति जो निरर्थक अनुष्ठानों में विश्वास करता है। उसे गुफा में वापस चले जाना चाहिए था, जहाँ उसके जैसे लोग रहते हैं। हम 2026 के पाँच महीने आगे बढ़ चुके हैं, पाषाण युग में नहीं!'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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