अमेरिका ने साल 2025 में एक बेसलाइन 10% टैरिफ लागू किया, जो अधिकांश देशों पर लागू होता है। कुछ देशों पर विशेष बड़े आयात शुल्क लगाया गया है, जो उस देश के ट्रेड डिस्बैलेंस, व्यापार नीतियों और द्विपक्षीय समझौतों पर निर्भर करता है। आज से पहले भारत पर भी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लागू था जो अब घटकर 43 प्रतिशत पर आ गया है। भारत के साथ-साथ अमेरिका ने ब्राज़ील पर भी 50% टैरिफ लागू किया था।, जबकि कई अन्य विकसित देशों पर 10–20% के बीच दरें हैं। आइए, यहां देखते हैं कि किन देशों पर अब कितना टैरिफ लागू है।
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अमेरिका के द्वारा लगाए गए टैरिफ
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अमेरिका द्वारा लगाया गया टैरिफ (%) | |
| भारत | 18% (2 फरवरी से घटने के बाद) | |
| चीन | 30% | |
| यूरोपीय यूनियन | 15% (कुछ वस्तुओं पर) | |
| कनाडा | 35% (USMCA के बाहर) | |
| मेक्सिको | 25% (USMCA के बाहर) | |
| इराक | 35% | |
| स्विटज़रलैंड | 39% | |
| म्यांमार | 40% | |
| लाओस | 40% | |
| सीरीया | 40% | |
| कज़ाकिस्तान | 27% | |
| निकारागुआ | 18% | |
| पाकिस्तान | 29% | |
| फ़िलिपीन्स | 17% | |
| इज़राइल | 17% | |
| थाईलैंड | 36% | |
| वियतनाम | 46% | |
| बांग्लादेश | 37% | |
| ऑस्ट्रेलिया | 10% | |
| नॉर्वे | 15% | |
| अन्य देशों पर बेसलाइन शुल्क | 10% |
टैरिफ लगाने का क्या मतलब
किसी देश पर ज्यादा टैरिफ लगाने का अर्थ है कि उस देश से आयात होने वाले सामान पर अधिक शुल्क लगाया जा रहा है। इसका सीधा असर उत्पादों की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दो देशों के आपसी संबंधों पर पड़ता है। जब अमेरिका या कोई अन्य देश किसी खास देश पर ऊंचा टैरिफ लागू करता है, तो उस देश से आने वाले उत्पाद महंगे हो जाते हैं। इससे आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिसका बोझ अक्सर उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।
आमतौर पर टैरिफ बढ़ाने का कदम व्यापारिक दबाव बनाने, घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने या रणनीतिक कारणों से उठाया जाता है। कई बार इसका उद्देश्य दूसरे देश को व्यापारिक नीतियों में बदलाव के लिए मजबूर करना भी होता है। ज्यादा टैरिफ लगाने से कम समय में घरेलू उद्योग को राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में व्यापार महंगा, महंगाई और वैश्विक तनाव बढ़ सकता है।