1. Hindi News
  2. धर्म
  3. रविवार प्रदोष व्रत की कथा, इसे पढ़ने से भगवान शिव की बरसेगी विशेष कृपा, हर परेशानी होगी दूर

रविवार प्रदोष व्रत की कथा, इसे पढ़ने से भगवान शिव की बरसेगी विशेष कृपा, हर परेशानी होगी दूर

 Published : Jul 12, 2026 07:14 am IST,  Updated : Jul 12, 2026 07:14 am IST

आज 12 जुलाई 2026 को रवि प्रदोष व्रत है। ये व्रत भगवान शिव की असीम कृपा पाने के लिए रखा जाता है। कहते हैं रविवार प्रदोष व्रत रखने से जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। चलिए जानते हैं रवि प्रदोष व्रत की कथा।

ravivar pradosh katha- India TV Hindi
रविवार प्रदोष व्रत कथा Image Source : INDIA TV

रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। कहते हैं इस व्रत को रखने से मुख्य रूप से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। साथ ही कुंडली में सूर्यदेव से जुड़ी समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत अच्छे स्वास्थ्य और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए भी उत्तम माना गया है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। 12 जुलाई 2026 को रवि प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:22 से रात 09:24 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त पर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। चलिए जानते हैं रविवार प्रदोष व्रत के दिन कौन सी कथा पढ़ी जाती है।

रविवार प्रदोष व्रत कथा

रविवार प्रदोष व्रत की कथा अनुसार, एक गांव में अति दीन ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी नियम से प्रदोष व्रत किया करती थी। उसका एक पुत्र भी था। एक समय वह पुत्र गंगा स्नान करने के लिए गया लेकिन दुर्भाग्य से उसे मार्ग में चोरों ने घेर लिया। चोर कहने लगे कि हम तुम्हें मारेंगे नहीं बस तुम हमें अपने पिता के धन के बारे में बतला दो। बालक दीनभाव से कहने लगा कि हम अत्यंत गरीब हैं। हमारे पास धन कहां से आयेगा? तब चोरों ने कहा कि तेरे पोटली में क्या बंधा है? बालक ने कहा कि मेरी मां ने मेरे लिए रोटियां रखी हैं। 

यह सुनकर चोरों ने उसे छोड़ दिया। बालक चलते हुए एक नगर में पहुंचा। नगर के पास एक बरगद का पेड़ था। बालक चलते-चलते थक गया था इसलिए वो बरगद के पेड़ के नीचे आराम करने लगा। थोड़ी ही देर में उसे नींद आ गई। उसी समय उस नगर के सिपाही चोरों को खोजते हुए बरगद के पेड़ के पास पहुंचे और उन्होंने बालक को चोर समझकर उसे बंदी बना लिया। राजा ने उस बालक को कारावास में बंद करने का आदेश दिया। जब लड़का अपने घर नहीं लौटा तो उसके माता-पिता परेशान हो गए। अगले दिन लड़के की माता का प्रदोष व्रत था। ब्राह्मणी ने नियम से प्रदोष व्रत किया और भगवान शंकर से अपने पुत्र की कुशलता की प्रार्थना की।

उसी रात भगवान शंकर राजा के सपने में आए और उन्होंने राजा को आदेश दिया कि वह बालक चोर नहीं है, अत: उसे प्रात:काल ur छोड़ दें, नहीं तो तुम्हारा सारा राज्य-वैभव नष्ट हो जाएगा। प्रात:काल उठते ही राजा ने उस बालक को कारावास से मुक्त कर दिया गया। फिर बालक ने अपनी सारी कहानी राजा को सुनाई। राजा ने अपने सिपाहियों को बालक के माता-पिता को राजदरबार में बुलाने का आदेश दिया। उसके माता-पिता भयभीत हो गए थे। राजा ने उनसे कहा कि आप भयभीत न हो। मैं जानता हूं कि आपका बालक निर्दोष है। राजा ने ब्राह्मण को 5 गांव दान में दिए जिससे वे सुखपूर्वक अपना जीवन बिता सकें। इस तरह से ब्राह्मण के जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो गया। अत: जो भी मनुष्य रवि प्रदोष व्रत को करता है उसे सुख जीवन और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

12 जुलाई को बन रहा है मासिक शिवरात्रि और रवि प्रदोष का शुभ संयोग, जरूर करें ये उपाय, दूर होगी हर परेशानी

12 जुलाई को किया जाएगा प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का व्रत, जानें मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।