अडाणी ग्रुप और इटली की दिग्गज कंपनी लियोनार्डो ने मंगलवार को भारत में एक एकीकृत हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। ये कदम 'मेक इन इंडिया' के प्रयासों को बढ़ावा देने और देश को ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा। ये मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम सैन्य मांगों को पूरा करने और हेलीकॉप्टर की मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और लियोनार्डो ने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में इस साझेदारी के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। ये साझेदारी भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को लक्षित करेगी, खासतौर पर लियोनार्डो के एडवांस्ड AW169M और AW109 ट्रैकर हेलीकॉप्टरों के लिए ऐसा किया जाएगा।
अगले 10 सालों तक हर साल लगभग 100 हेलीकॉप्टरों की होगी जरूरत
एक बयान में कहा गया कि ये सहयोग चरणबद्ध स्वदेशीकरण, मजबूत रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) क्षमताओं तथा व्यापक पायलट ट्रेनिंग की सुविधा प्रदान करेगा। भारत में हेलीकॉप्टर की उपलब्धता काफी कम है, जहां देश की जनसंख्या के हिसाब से 250 से भी कम हेलीकॉप्टर हैं। अनुमान है कि देश को अगले 10 सालों तक सालाना लगभग 100 हेलीकॉप्टरों की जरूरत होगी। अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के डायरेक्टर जीत अडाणी ने कहा कि वे एक ऐसे एविएशन इकोसिस्टम की नींव रख रहे हैं, जो नागरिक और रक्षा दोनों जरूरतों में राष्ट्र की सेवा करेगा। उन्होंने कहा कि लियोनार्डो के साथ साझेदारी न सिर्फ साझा विशेषज्ञता पर बल्कि साझा उद्देश्य पर आधारित है।
भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा आने वाले दशक में 1000 से ज्यादा हेलीकॉप्टरों की मांग का अनुमान
जीत अडाणी ने आगे कहा, ''हम मिलकर भारत की धरती पर एक ऐसा इकोसिस्टम बनाएंगे जो मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, ट्रेनिंग और विश्व स्तरीय सहायता को एक सूत्र में पिरोएगा।'' अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा आने वाले दशक में 1000 से ज्यादा हेलीकॉप्टरों की मांग के अनुमान को देखते हुए, ये साझेदारी महत्वपूर्ण है। लियोनार्डो एयरोस्पेस, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में एक प्रमुख वैश्विक कंपनी है। लियोनार्डो हेलीकॉप्टर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर जियान पिएरो कुटिलो ने कहा कि भारत एक बड़ा बाजार है और देश के सशस्त्र बलों में हेलीकॉप्टरों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।



































