शमशाद बेगम को कैमरे के सामने आना पसंद नहीं था, इसलिए वह कभी कैमरे के सामने नहीं आईं। कुछ लोगों का मानना है कि शमशाद खुद को खूबसूरत नहीं मानती थीं, इसलिए पर्दे पर नहीं आती थीं। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि वह कभी कैमरे के सामने नहीं जाएंगी। शमशाद बेगम के.एल. सहगल की बहुत बड़ी फैन थीं। उन्होंने सहगल की फिल्म 'देवदास' 14 बार देखी थी। यही नहीं वह उनकी गायकी से भी काफी प्रभावित थीं। शमशाद बेगम ने 'निशान' जैसी फिल्मों नें बहुभाषी गीत भी गाए। फिल्म 'शबनम' में बर्मन दा के संगीत निर्देशन में उन्होंने एक गाने में छह भाषाओं में एक साथ गाया। संगीत के जानकारों का मानना है कि शमशाद बेगम की आवाज कई पुरुष गायकों पर भी भारी पड़ती थी। उनकी आवाज के लोग कायल थे।
फिल्मी दुनिया में शमशाद को गाने का मौका देने वाले संगीतकार ओपी नैय्यर उनकी आवाज को 'टेंपल बेल' कहते थे। वह उनकी आवाज की तुलना मंदिर में बजने वाली घंटियों से करते थे। शमशाद की गायन शैली पूरी तरह मौलिक थी और उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोंसले, गीता दत्त और अमीरबाई कर्नाटकी के दौर में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में शमशाद बेगम को 'प्रेस्टिजियस ओ.पी. नैयर अवार्ड' और 'पद्मभूषण' से नवाजा गया था। सुरीली आवाज के दम पर मनोरंजन-जगत में शीर्ष मुकाम हासिल कर चुकी मशहूर पाश्र्वगायिका शमशाद बेगम का निधन 23 अप्रैल, 2013 को मुंबई में हुआ। उनके दिलकश नगमें हमेशा उनकी यादों को तरोताजा बनाए रहेंगे।
Latest Bollywood News