'पंखे से उल्टा लटका कर पंखा चला दिया', यश ने याद किए पिता संग बीते बचपन के दिन, बोले- 14 रुपये कमाकर भी पूरी की हर जिद्द
'आप की अदालत' में सुपरस्टार यश ने पिता की सख्त परवरिश, पंखे से लटकाने के किस्से और संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने 14 रुपये कमाने वाले पिता के त्याग और स्वाभिमान को नमन किया।

सुपरस्टार यश ने लोकप्रिय टीवी शो 'आप की अदालत' में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के साथ बातचीत के दौरान अपने निजी जीवन, बचपन की अनुशासनप्रियता और अपने पिता के संघर्ष को लेकर कई बेहद भावुक और दिलचस्प खुलासे किए। अपनी फिल्मों के ब्लॉकबस्टर प्रदर्शन से वैश्विक पहचान बना चुके कन्नड़ सिनेमा के इस दिग्गज अभिनेता ने अपनी शुरुआती जिंदगी के उन पलों को याद किया जब उनके पिता एक साधारण बस ड्राइवर हुआ करते थे। यश ने बताया कि कैसे उनकी अपार सफलता और स्टारडम के बावजूद उनके पिता ने अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत का रास्ता कभी नहीं छोड़ा और लगातार अपनी नौकरी करते रहे।
पिता की मार, 'टाइगर' का खौफ और बेहोश होने की वो झूठी एक्टिंग
अपनी बचपन की शरारतों और पिता के सख्त मिजाज को याद करते हुए यश ने साक्षात्कार में बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। अभिनेता ने बताया कि वे बचपन में काफी जिद्दी और खुराफाती स्वभाव के थे, जिसकी वजह से उन्हें पिता के हाथों काफी डांट-मार सुननी पड़ती थी। बचपन के एक खौफनाक वाकये को बयां करते हुए उन्होंने बताया, 'पिता ने पंखे से उलटा लटका कर पंखा चला दिया था, पिता हमेशा मारते थे, मैं बहुत बदमाश था, बहुत शरारत करता था, जिद्दी भी था। पापा स्कूल में था तब भी मारते थे, कॉलेज चला गया फिर मारते थे, कॉलेज के अंदर भी आकर मार देते थे।'
पिता का खौफ केवल यश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उनके सहपाठी और दोस्त भी उनसे बुरी तरह घबराते थे। यश ने आगे कहा, 'मेरे दोस्त पापा को टाइगर कहते थे, वो उनसे डरते थे। एक बार वो मुझे कॉलेज में मारने लगे, तब मैंने भी एक्टिंग की कि मैं बेहोश हो गया हूं, गिर गया। इसके बाद उन्होंने मारना बंद किया।' जब होस्ट ने पूछा कि आज उनकी इतनी बड़ी कामयाबी के बाद पिता उनके बारे में क्या सोचते हैं तो यश ने मुस्कुराते हुए कहा, 'पापा अच्छा फील करते हैं, लेकिन अब भी उन्हें कुछ चीजे खराब लगती हैं, उन्हें लगता है कि अभी भी मुझमें बचपना है और मैं जिद्दी हूं।'
14 रुपये की दिहाड़ी और स्वाभिमान: जब हीरो बनने के बाद भी पिता चलाते रहे बस
संघर्ष के दिनों को याद करते हुए यश ने अपनी महत्वाकांक्षा और पिता के अतुलनीय योगदान पर गर्व जताया। उन्होंने कहा, 'जब पैसा नहीं था तब भी हीरो वाला एटिट्यूड था।' अपने पिता के त्याग को याद करते हुए यश ने भावुक लहजे में कहा, 'पिता बस ड्राइवर थे, 14 रुपये रोज कमाते थे, लेकिन किसी चीज की कमी नहीं होने देते थे, उनके पास जो कुछ भी था सब उन्होंने दे दिया था।' यश जब भारतीय सिनेमा के स्थापित अभिनेता बन गए और करोड़ों दिलों पर राज करने लगे, तब भी उनके पिता ने अपनी सरकारी बस ड्राइवर की नौकरी छोड़ने से इनकार कर दिया था। पिता की इस सादगी और मेहनत करने के जुनून पर बात करते हुए सुपरस्टार ने बताया, 'मैं हीरो बन गया वो फिर भी बस चलाते थे, जब तक मेरी बहन को बच्चा नहीं हुआ वो तब तक चलाते थे। वो मानते थे कि मेरी सफलता से उन्हें जो सम्मान मिल रहा वो झूठा है और वो कहते थे कि तुम अपना काम करो मैं अपना कर रहा हूं। वो मेहनत करते रहना चाहते थे।'