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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: क्या BJP के लिए अब भी चुनौती बरकरार है या बन रही नई जमीन?

क्या 2026 के चुनाव भी बीजेपी के लिए अबूझ पहेली बन गए हैं? 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 4 सीटें ही जीत पाई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह- India TV Hindi
Image Source : PTI केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

तमिलनाडु की राजनीति दशकों से द्रविड़ दलों- DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। क्षेत्रीय पहचान, भाषा और सांस्कृतिक मुद्दों के दम पर इन पार्टियों ने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। यही वजह है कि BJP जैसी राष्ट्रीय पार्टी तमाम कोशिशों के बावजूद मतदाताओं के दिलों तक नहीं पहुंच पाई है।

BJP की धीमी लेकिन अहम बढ़त

2021 विधानसभा चुनाव में BJP ने AIADMK के साथ गठबंधन कर 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 4 सीटों पर जीत हासिल कर पाई। वोट शेयर भी 3% से कम रहा।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में BJP को अप्रत्याशित बढ़त देखने को मिली। BJP ने पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलई के हाथों में पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान सौंपी। पार्टी ने राज्य भर में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। 2024 का चुनाव BJP ने किसी भी द्रविड़ दल के साथ नहीं लड़ा, बावजूद इसके BJP को जितने वोट मिले उसने सबको चौंका दिया। पार्टी लोकसभा की एक भी सीट नहीं जीत पाई, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 24 के लोकसभा चुनावों में BJP ने दक्षिणी तमिलनाडु और राजधानी चेन्नई में बेहतरीन प्रदर्शन किया।

दक्षिण तमिलनाडु के कन्याकुमारी में BJP उम्मीदवार ने 35.6 फीसदी वोट हासिल किया, जबकि तिरुनेलवेली और रामनाथपुरम सीट पर वोट प्रतिशत 30 फीसदी से ज्यादा रहा। कुल मिलाकर दक्षिण तमिलनाडु में BJP ने अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर करीब 23 फीसदी वोट हासिल किया, जबकि पश्चिमी तमिलनाडु में करीब 19 फीसदी और चेन्नई में करीब 17 फीसदी वोट पार्टी को मिले। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी एक सीट भी नहीं जीत पाई, लेकिन नॉन हिंदी हार्टलैंड में पार्टी की बढ़ती स्वीकृति ने कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर दिया।

2026 से पहले गठबंधन

2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने DMK को सत्ता से बाहर करने के लिए AIADMK से गठबंधन किया। इसके लिए  AIADMK के महासचिव यड्डप्पाडी पलनीस्वामी ने अन्नामलई को प्रदेश BJP अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर दी। गठबंधन की मजबूरी के चलते पार्टी ने अन्नामलई की जगह नैनार नागेंद्रन को नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद, अन्नामलई को नजरअंदाज किया जाने लगा, बात यहां तक आ गई कि अन्नामलई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पिता की तबीयत ठीक नहीं होने की बात कहते हुए चुनाव प्रचार से खुद को बाहर रखने का फैसला कर लिया, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की समझाईश के बाद अब वे चुनाव प्रचार करते हुए दिख रहे हैं। BJP वोटर्स ये मानते हैं कि अन्नामलई को साइडलाइन करने से पार्टी का मोमेंटम कमजोर हुआ है।

27 सीटों पर BJP की परीक्षा

इस बार BJP 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिनमें कुछ सीटों पर पार्टी को खास उम्मीदें हैं। प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन इस बार सातुर से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले चुनावों में नागेंद्रन ने तिरुनेलवेली से चुनाव जीता था। फीडबैक मिला कि इस सीट पर उनके खिलाफ असंतोष है और सातुर सीट पर AIADMK की पकड़ मजबूत है। राजेंद्रन AIADMK से ही BJP में आए हैं, इसलिए उन्होंने इस सेफ सीट को चुना है।

इसके अलावा, कोयम्बटूर नॉर्थ सीट से भी BJP को जीत की उम्मीद है। हालांकि, BJP महिला मोर्चा की अध्यक्ष वानती श्रीनिवासन ने पिछला चुनाव कोयम्बटूर साउथ से लड़ा था और अभिनेता कमल हासन को हराकर जैंट किलर बनी थीं, लेकिन इस बार DMK ने वहां से अपने हैवी वेट नेता सेंथिल बालाजी को टिकट दे दिया, जिससे वानथी की सीट फंस सकती थी, इसलिए उन्होंने सीट बदल ली और कोयम्बटूर साउथ को चुन लिया। यहां पर भी BJP का वोट बैंक मजबूत है।

कन्याकुमारी जिले में BJP बहुत ज्यादा मजबूत हुई है। यहां पर ज्यादातर सीटों में BJP की कांग्रेस से सीधी टक्कर है। नागकोइल से सिटिंग विधायक एमआर गांधी और कांग्रेस से BJP में आई विजय धारिनि की जीत की उम्मीद जताई जा रही है।

इसी तरह तेनकासी जिले के वासुदेवनल्लूर सीट से BJP के युवा नेता अन्थन अय्यास्वामी अच्छा प्रदर्शन करते हुए दिख रहे हैं। 

अविनाशी (SC)  सीट से उम्मीदवार डॉ. एल. मुरुगन  दलित वोट बैंक और NDA गठबंधन से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।

वहीं, चेन्नई की मइलापुर सीट से फार्मर गवर्नर डॉ. तमिलइसई सौंदरराजन शहरी मध्यम वर्ग और महिला मतदाताओं में अपील की वजह से जीत दर्ज कर सकती हैं।

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