Explainer: अमेरिका के ईरान पर हमला करने का एक मकसद उसका संवर्धित यूरेनियम लेना भी था, वैसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये कहकर हमला किया था कि वे रिजीम चेंज करना चाहते हैं। लेकिन अमेरिका सहित इजरायल की नजर ईरान के यूरेनियम पर वर्षों से टिकी है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की अवधि चल रही है। ईरान के साथ 40 से ज्यादा दिनों तक चले युद्ध में ट्रंप ने अमेरिका की जीत के कई दावे किये हैं और हाल फिलहाल उन्होंने ये भी दावा किया है कि ईरान अपना यूरेनियम डस्ट यानि परमाणु अवशेष अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है।
ईरान पर ट्रंप और नेतन्याहू की क्यों है तिरछी नजर
अमेरिका और इजरायल बार बार दावा करते रहे हैं कि ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक 60 परसेंट एनरिच्ड किया गया यूरेनियम मौजूद है, जिसे वह परमाणु बम या परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन ईरान का कहना है कि यूरेनियम एनरिच्ड करने का उसका उद्देश्य बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा है, न कि परमाणु हथियार बनाना। हालांकि उपलब्ध आंकड़े अलग ही संकेत देते हैं, जिससे अमेरिका और इजरायल की चिंता बनी रहती है।
माना जाता है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को पहाड़ी के मलबे के नीचे दबा रखा है, जिसे अमेरिका ने नष्ट करने का दावा किया था। कहा जा रहा है कि ईरान ने अपना एनरिच्ड यूरेनियम इस्फ़हान में परमाणु परिसर में एक भूमिगत सुरंग में और नतान्ज़ में एक स्टोर में छुपा रखा है। ये भी दावा किया जाता है कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन के लिए सेंट्रीफ्यूज हैं और एक नया भूमिगत संवर्धन स्थल स्थापित करने की क्षमता भी है, जिससे वह संवर्धित करता रहता है।
ट्रंप ने ईरान के उस एनरिच्ड यूरेनियम के लिए “यूरेनियम डस्ट” शब्द का इस्तेमाल किया है, जिसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का मानना है कि यह पिछले साल जून में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु संयंत्रों पर किए गए हमलों के बाद जमीन के काफी नीचे दबा हुआ है।

यूरेनियम डस्ट क्या होता है, कैसे बनता है
यूरेनियम डस्ट आमतौर पर 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को कहते हैं, जिसे प्राकृतिक यूरेनियम को ट्रीट करके तैयार किया जाता है। प्राकृतिक यूरेनियम में करीब 99 प्रतिशत यू-238 और करीब 0.7 प्रतिशत यू-235 होता है। जब इसे संवर्धित किया जाता है तो इसमें यू-235 की मात्रा बढ़ाई जाती है। इस संवर्धित यूरेनियम को सामान्य तौर पर धातु, आक्साइड पाउडर, या यूएफ 6 गैस जैसे रूपों में इकट्ठा कर अक्सर ठोस आक्साइड या सील किए गए कंटेनरों में सुरक्षित रखा जाता है। इसे सीलबंद परिसर में आइएईए जैसी संस्था की निगरानी में रखा जाता है। इसमें विकिरण का खतरा काफी अधिक होता है, इसलिए इसे साधारण धातु या पाउडर की तरह नहीं रखा जा सकता।
यूरेनियम डस्ट बहुत बारीक कणों वाला पाउडर या धूल जैसा यूरेनियम का रूप होता है और जब यूरेनियम अयस्क को प्रोसेस करने के बाद कंस्ट्रेट पाउडर मिलता है.इसका रंग अक्सर पीला-भूरा होता है, इसलिए इसे “येलो केक” कहा जाता है. यूरेनियम गैस आमतौर पर यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF6) को कहा जाता है, जो संवर्धन प्रक्रिया में गैस के रूप में इस्तेमाल होता है। एनरिच्ड यूरेनियम ऐसे यूरेनियम को कहा जाता है, जिसमें U-235 की मात्रा बढ़ाई गई हो और यही असली एनरिच्ड यूरेनियम होता है।

धातु यूरेनियम को रासायनिक प्रोसेसिंग के बाद येलोकेक बनाया जाता है और फिर येलोकेक से गैस बनाई जाती है ताकि संवर्धन प्लांट में काम हो सके। गैस से एनरिच्ड यूरेनियम बनाया जाता है, इस स्थिति में इसे फिर गैस से ठोस में बदला जाता है। और बता दें कि मुर्गी के अंडे के आकार की यूरेनियम ईंधन की मात्रा 88 टन कोयले के बराबर बिजली उत्पन्न कर सकती है।
यूरेनियम से हथियार कैसे बनता है
परमाणु हथियार बनाने के लिए, प्राकृतिक यूरेनियम को काफी एनरिच्ड करने की आवश्यकता होती है। यूरेनियम को गैस (यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड) में बदला जाता है और फिर उच्च गति वाले सेंट्रीफ्यूज में घुमाया जाता है। अत्यधिक शक्तिशाली बम बनाने के लिए यूरेनियम-235 की शुद्धता को 90% या उससे अधिक तक बढ़ाया जाता है। इस स्तर का यूरेनियम हथियार-ग्रेड माना जाता है। बम के अंदर यूरेनियम के दो या अधिक टुकड़े अलग-अलग रखे जाते हैं, जो खुद से विस्फोट नहीं करते। जब ये टुकड़े टकराते हैं तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। ये नए न्यूट्रॉन दूसरे U-235 परमाणुओं से टकराते हैं, जिससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाती है। यह प्रक्रिया मिलीसेकंड में होती है, जिससे भयानक विस्फोट होता है।