नॉर्मल डिलीवरी के लिए क्या उपाय करें, आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया

आजकल ज्यादातर महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी हो रही हैं। इसका कारण स्वास्थ्य और कई बार महिलाओं की पसंद भी होती है। कुछ महिलाएं खुद से सी-सेक्शन चुनती हैं। लेकिन अगर आप नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं तो आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के बताए इन टिप्स को फॉलो कर सकती हैं। इससे नॉर्मल डिलीवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।

एक्टिव रहें- अगर प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत न हो, तो रोज हल्की सैर करें और प्रीनेटल योग करें। फिजिकली एक्टिव रहने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे डिलीवरी के समय मदद मिलती है।
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एक्टिव रहें- अगर प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत न हो, तो रोज हल्की सैर करें और प्रीनेटल योग करें। फिजिकली एक्टिव रहने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे डिलीवरी के समय मदद मिलती है।
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नियमित वजन- बहुत ज़्यादा वजन बढ़ने से बच्चा बड़ा हो सकता है और जेस्टेशनल डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थितियां जिनमें सिजेरियन सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। दो लोगों के लिए खाने के बजाय, बैलेंस्ड और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट पर ध्यान दें।
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हाइड्रेटेड रहें- पक्का करें कि आपके शरीर में पानी की कमी न हो। सही हाइड्रेशन लेबर के दौरान एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करता है। बहुत ज़्यादा चिंता या डर लेबर प्रोसेस पर असर डाल सकता है। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज (जैसे लामाज़ तकनीक) और मेडिटेशन से मानसिक मजबूती बढ़ाएं।
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आयुर्वेद में माना गया है की जितना जरूरी आपका शारीरिक स्वास्थ्य है उससे कई ज़्यादा आपका मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है, क्योंकि मन शांत रहेगा तभी आपका शरीर भी संतुलित रहेगा। प्रेग्नेंसी के आठवें महीने में जितना हो सके सोना चाहिए, क्योंकि यह एक उत्कृष्ट समय होता है। इस दौरान 'ओजस' नाम का सूक्ष्म तरल पदार्थ माँ से बच्चे तक पहुँचता है, जो ऊर्जा और इम्यून सिस्टम के काम करने के लिए जरूरी होता है।
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रेगुलर चेक अप और अल्ट्रासाउंड- अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें, नौवें महीने में अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि बच्चा सिर-नीचे पोज़िशन में है या नहीं और डिलीवरी के लिए पेल्विक बोन की स्थिति कैसी है। सही समय पर सही जानकारी होने से जोखिम कम करने में मदद मिलती है।