डॉक्टर से जानें सर्वाइकल कैंसर के कितने स्टेज होते हैं?

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले आम लेकिन गंभीर कैंसरों में से एक है। यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होता है और आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है। आर्ट ऑफ़ हेलिंग कैंसर में डायरेक्ट ऑन्कोलॉजी डॉ. मनदीप, कहते हैं कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के या बिल्कुल नहीं होते, इसलिए समय पर पहचान न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। सर्वाइकल कैंसर को अलग-अलग स्टेज में बांटा गया है, जिससे बीमारी की गंभीरता और इलाज की दिशा तय की जाती है।
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सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले आम लेकिन गंभीर कैंसरों में से एक है। यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होता है और आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है। आर्ट ऑफ़ हेलिंग कैंसर में डायरेक्ट ऑन्कोलॉजी डॉ. मनदीप, कहते हैं कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के या बिल्कुल नहीं होते, इसलिए समय पर पहचान न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। सर्वाइकल कैंसर को अलग-अलग स्टेज में बांटा गया है, जिससे बीमारी की गंभीरता और इलाज की दिशा तय की जाती है।
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सर्वाइकल कैंसर को मुख्य रूप से चार स्टेज में वर्गीकृत किया जाता है। स्टेज 1 में कैंसर केवल सर्विक्स तक ही सीमित रहता है। इस अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते या फिर हल्का असामान्य योनि स्राव, हल्का ब्लीडिंग या पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग हो सकती है। नियमित पैप स्मीयर टेस्ट या स्क्रीनिंग से इस स्टेज में कैंसर का पता लगाया जा सकता है और इलाज की सफलता की संभावना बहुत अधिक होती है।
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स्टेज 2 में कैंसर सर्विक्स से बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों तक फैलने लगता है, लेकिन यह अभी पेल्विक वॉल या योनि के निचले हिस्से तक नहीं पहुंचता। इस दौरान संभोग के बाद ब्लीडिंग, लगातार असामान्य डिस्चार्ज और हल्का पेल्विक दर्द महसूस हो सकता है। कई महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे निदान में देरी हो जाती है।
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स्टेज 3 में कैंसर और अधिक फैल जाता है और पेल्विक वॉल या योनि के निचले हिस्से तक पहुंच सकता है। इस अवस्था में पेशाब करने में दिक्कत, पैरों में सूजन, कमर या पेल्विक क्षेत्र में लगातार दर्द और अत्यधिक दुर्गंधयुक्त स्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह स्टेज गंभीर मानी जाती है और इसमें इलाज लंबा और जटिल हो सकता है।
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स्टेज 4 सर्वाइकल कैंसर की सबसे उन्नत अवस्था होती है जिसमें कैंसर शरीर के अन्य अंगों जैसे मूत्राशय, मलाशय, फेफड़े या लीवर तक फैल सकता है। इस स्टेज में तेज दर्द, वजन तेजी से गिरना, अत्यधिक थकान, पेशाब या मल में खून आना और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। इस अवस्था में इलाज का उद्देश्य बीमारी को नियंत्रित करना और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना होता है।
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सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है, खासकर 21 वर्ष की उम्र के बाद। पैप स्मीयर टेस्ट, एचपीवी टेस्ट और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी के जरिए कैंसर या प्री-कैंसर बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। किसी भी तरह की असामान्य ब्लीडिंग, लंबे समय तक चलने वाला डिस्चार्ज या पेल्विक दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती पहचान ही इस कैंसर से बचाव और सफल इलाज की सबसे मजबूत कुंजी है।