50 की उम्र के बाद बढ़ जाता है Alzheimer का खतरा, जानें कैसे करें अपना बचाव?

50 वर्ष की उम्र के बाद दिमागी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ भूलने की बीमारी (Alzheimer’s) का खतरा भी बढ़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
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50 वर्ष की उम्र के बाद दिमागी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है। उम्र बढ़ने के साथ भूलने की बीमारी (Alzheimer’s) का खतरा भी बढ़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
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आकाश हेल्थकेयर में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं विभाग अध्यक्ष डॉक्टर मधुकर भारद्वाज के मुताबिक , "Alzheimer’s को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और मानसिक सक्रियता से इसके खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। दिमाग को एक्टिव रखना, जैसे किताब पढ़ना, नई चीजें सीखना या पहेलियां सुलझाना, भी बेहद फायदेमंद होता है।"
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डाइट पर ध्यान दें: पालक, ब्रोकोली, गाजर, बेरीज़ और संतरे जैसे फल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो दिमाग को डैमेज से बचाते हैं। मछली, अलसी और अखरोट ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करने से ब्रेन हेल्थ बेहतर रहती है। ज्यादा नमक, चीनी और तैलीय खाना दिमाग और दिल दोनों को नुकसान पहुंचाता है। पर्याप्त पानी पीना और हर्बल टी लेना मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करता है।
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नियमित व्यायाम से न सिर्फ शरीर बल्कि दिमाग भी स्वस्थ रहता है। रोजाना 30 मिनट तेज चाल से चलना ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। तनाव कम करने और मेमोरी बढ़ाने के लिए योगासन और प्राणायाम बेहद उपयोगी हैं। शरीर को लचीला रखने के साथ मानसिक सेहत पर भी सकारात्मक असर डालते हैं।
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7-8 घंटे की गहरी नींद से दिमाग रिलैक्स होता है और मेमोरी मजबूत रहती है। तनाव Alzheimer’s के खतरे को बढ़ाता है। मेडिटेशन और म्यूजिक थेरेपी मददगार हो सकते हैं। दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करने से दिमाग सक्रिय रहता है और अकेलापन कम होता है। कोई नई भाषा, म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट या कंप्यूटर स्किल सीखना मस्तिष्क को तेज बनाए रखता है।