बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ने के लिए जरूरी हैं ये 5 स्क्रीनिंग टेस्ट

अगर आपको सेहत को लेकर पहले से सावधान रहना है तो समय-समय पर अपनी जांच कराना जरूरी है। खासकर उन लोगों के लिए स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण हो सकती है जिनकी उम्र, पारिवारिक इतिहास या जीवनशैली के कारण किसी बीमारी का खतरा ज्यादा है। आइये जानते हैं आपको कौन से टेस्ट कराने चाहिए।

कोलोनोस्कोपी और सिग्मोइडोस्कोपी ऐसे टेस्ट हैं जिनसे आंतों और कोलन यानी बड़ी आंत को अंदर से करीब से देखा जाता है। इन जांचों की मदद से कैंसर या कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। हार्ट सर्जन डॉक्टर जैरेमी लंदन के अनुसार, इन जांचों से कैंसर वाली गांठों के साथ-साथ ऐसी गांठों यानी पॉलीप्स का भी पता चल सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं। इन्हें कैंसर बनने से पहले ही हटाया जा सकता है। उनके मुताबिक, कोलोनोस्कोपी या सिग्मोइडोस्कोपी से कोलन कैंसर से होने वाली मौतों का खतरा करीब 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
1/5 Image Source : Magnific
कोलोनोस्कोपी और सिग्मोइडोस्कोपी ऐसे टेस्ट हैं जिनसे आंतों और कोलन यानी बड़ी आंत को अंदर से करीब से देखा जाता है। इन जांचों की मदद से कैंसर या कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। हार्ट सर्जन डॉक्टर जैरेमी लंदन के अनुसार, इन जांचों से कैंसर वाली गांठों के साथ-साथ ऐसी गांठों यानी पॉलीप्स का भी पता चल सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती हैं। इन्हें कैंसर बनने से पहले ही हटाया जा सकता है। उनके मुताबिक, कोलोनोस्कोपी या सिग्मोइडोस्कोपी से कोलन कैंसर से होने वाली मौतों का खतरा करीब 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
2/5 Image Source : Freepik
मैमोग्राफी में कम मात्रा वाली एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल करके स्तनों की तस्वीर ली जाती है। इससे बिना किसी लक्षण के भी स्तन कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। समय पर जांच होने से किसी भी कंडीशन का पता जल्दी चल सकता है और इलाज भी समय पर शुरू किया जा सकता है। डॉक्टर लंदन के अनुसार, मैमोग्राफी से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे में करीब 20 प्रतिशत और स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में करीब 22 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
3/5 Image Source : Magnific
पैप स्मीयर महिलाओं के लिए सर्वाइकल यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच का एक महत्वपूर्ण तरीका है। इससे गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों का पता कैंसर बनने से काफी पहले लगाया जा सकता है। समय पर जांच और इलाज से सर्वाइकल कैंसर को गंभीर होने से रोका जा सकता है। डॉक्टर लंदन के अनुसार, नियमित स्क्रीनिंग शुरू होने के बाद सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत से ज्यादा कमी आई है।
4/5 Image Source : Freepik
बिना कॉन्ट्रास्ट वाली लो-डोज चेस्ट CT स्कैन, जो लोग अभी धूम्रपान करते हैं या पहले धूम्रपान कर चुके हैं, उनके लिए डॉक्टर की सलाह पर लो-डोज चेस्ट CT स्कैन उपयोगी हो सकता है। इस जांच से फेफड़ों की अंदरूनी तस्वीर साफ दिखाई देती है और फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती संकेतों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर लंदन के अनुसार, इस तरह की जांच से फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों में करीब 20 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
5/5 Image Source : Magnific
पुरुषों के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड भी जरूरी है। इससे पेट के अंदर मौजूद अंगों और बड़ी रक्त वाहिकाओं की जांच में मदद कर सकता है। इससे पेट की मुख्य रक्त वाहिका एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (AAA) जैसी गंभीर समस्या का पता लगाया जा सकता है। यह समस्या कई बार बिना लक्षण के भी हो सकती है और रक्त वाहिका फटने पर जानलेवा हो सकती है। डॉक्टर लंदन के अनुसार, पुरुषों में इसकी स्क्रीनिंग से रक्त वाहिका फटने के कारण होने वाली मौत के खतरे में करीब 33 प्रतिशत तक कमी देखी गई है।