कीमोथेरेपी के दौरान कैंसर मरीज झेलते हैं कैसी मुश्किलें? डॉक्टर से जानें साइड इफेक्ट्स और निपटने के तरीके

कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज का एक अहम हिस्सा है। आर्ट ऑफ हीलिंग कैंसर में चीफ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनदीप सिंह बताते हैं कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि कीमोथेरेपी कई बार जान बचाने वाली साबित होती है, लेकिन इसके दौरान मरीज को कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह जरूरी है कि मरीज और उनके परिवार को इन साइड इफेक्ट्स के बारे में सही जानकारी हो, ताकि वे इलाज के इस कठिन दौर को बेहतर तरीके से समझ सकें और झेल सकें।
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कीमोथेरेपी कैंसर के इलाज का एक अहम हिस्सा है। आर्ट ऑफ हीलिंग कैंसर में चीफ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनदीप सिंह बताते हैं कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि कीमोथेरेपी कई बार जान बचाने वाली साबित होती है, लेकिन इसके दौरान मरीज को कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह जरूरी है कि मरीज और उनके परिवार को इन साइड इफेक्ट्स के बारे में सही जानकारी हो, ताकि वे इलाज के इस कठिन दौर को बेहतर तरीके से समझ सकें और झेल सकें।
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थकान की शिकायत: कीमोथेरेपी के दौरान सबसे आम शिकायत थकान की होती है। यह सामान्य थकान से अलग होती है और आराम करने के बावजूद भी बनी रहती है। यह कमजोरी इस वजह से होती है क्योंकि कीमोथेरेपी न सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को, बल्कि कुछ हद तक स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करती है।
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बालों का झड़ना: कीमोथेरेपी के कारण शरीर के बाल झड़ सकते हैं, खासकर सिर के। यह प्रभाव अस्थायी होता है और इलाज पूरा होने के बाद बाल दोबारा उग सकते हैं, लेकिन इस बदलाव से मानसिक झटका लगना स्वाभाविक है।
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मतली और उल्टी की समस्या: कई मरीजों को कीमोथेरेपी के बाद मतली और उल्टी की समस्या होती है। हालांकि अब ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं जो इन लक्षणों को काफी हद तक कम कर सकती हैं, फिर भी यह एक आम साइड इफेक्ट है।
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संक्रमण का खतरा: चूंकि कीमोथेरेपी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है, इसलिए इस दौरान मरीजों को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में साफ-सफाई और भीड़ से दूरी बनाए रखना जरूरी होता है।
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डिप्रेशन-चिड़चिड़ापन: कीमोथेरेपी के दौरान कई मरीजों को डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, घबराहट या अकेलेपन की भावना महसूस हो सकती है। इस समय मानसिक सहयोग और परिवार का साथ बहुत जरूरी होता है।
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एनीमिया: कीमोथेरेपी की दवाएं बोन मैरो को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे रेड ब्लड सेल्स कम हो जाती हैं और एनीमिया की स्थिति बन सकती है। कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स भले ही परेशान करने वाले हों, लेकिन ये इलाज का एक जरूरी हिस्सा हैं। डॉक्टर की सलाह मानना, पौष्टिक आहार लेना, पर्याप्त आराम करना और मानसिक रूप से मजबूत रहना इस कठिन समय में मददगार साबित होता है।