पानी की कमी से किडनी पर क्या असर होता है?

लंबे समय तक पानी कम पीने से किडनी पर तनाव बढ़ता है। पानी की कमी होने से आपके खून की मात्रा थोड़ी कम हो जाती है और खून गाढ़ा हो जाता है। चिपचिपा और गाढ़ा खून नेफ्रॉनों के लिए छानना बहुत मुश्किल होता है, जिससे किडनी के सॉफ्ट टिशूज को काफी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे गुर्दे पर कार्यभार तुरंत बढ़ जाता है।
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लंबे समय तक पानी कम पीने से किडनी पर तनाव बढ़ता है। पानी की कमी होने से आपके खून की मात्रा थोड़ी कम हो जाती है और खून गाढ़ा हो जाता है। चिपचिपा और गाढ़ा खून नेफ्रॉनों के लिए छानना बहुत मुश्किल होता है, जिससे किडनी के सॉफ्ट टिशूज को काफी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे गुर्दे पर कार्यभार तुरंत बढ़ जाता है।
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लंबे समय के लिए तनाव बना रहे तो गुर्दे के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और उनमें लंबे समय तक बने रहने वाले निशान पैदा हो सकते हैं। इससे किडनी की पुरानी समस्याएं हो सकती हैं।
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पानी की कमी से मूत्र की मात्रा कम होने पर, अपशिष्ट पदार्थ और विषाक्त पदार्थ जैसे यूरिया और यूरिक एसिड पेशाब और पेशाब के रास्ते बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं। जिससे टॉयलेट के रास्ते में जलन हो सकती है, जिससे सूजन का खतरा बढ़ जाता है।
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शरीर में पानी की कमी से खनिज असंतुलन हो जाता है, जिससे गुर्दे की पथरी का खतरा शुरू होता है। क्रिस्टल बनने लगते हैं, कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे पदार्थ घुले हुए नहीं रह सकते। जिससे किडनी और टॉयलेट के रास्ते में रेत जैसी क्रिस्टल संरचनाएं बनती हैं।
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लगातार पानी कम पीने से ये सूक्ष्म क्रिस्टल हफ्तों और महीनों तक बढ़ते और एकत्रित होते रहते हैं और फिर गुर्दे की पथरी का कारण बनते हैं। जब ये पथरी लंबे समय में काफी बड़ी हो जाती है तो टॉयलेट के रास्ते में फंस सकती है। जिससे मरीज को बहुत तेज दर्द होता है।