डायबिटीज के मरीजों को क्यों पीना चाहिए करेले का जूस?

करेले में पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन नाम का एक तत्व पाया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से ठीक वैसे ही काम करता है जैसे हमारे शरीर में इंसुलिन काम करता है। यह खून में बढ़े हुए ग्लूकोज के स्तर को कम करने में सीधे मदद करता है।
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करेले में पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन नाम का एक तत्व पाया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से ठीक वैसे ही काम करता है जैसे हमारे शरीर में इंसुलिन काम करता है। यह खून में बढ़े हुए ग्लूकोज के स्तर को कम करने में सीधे मदद करता है।
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करेले में चारेंटिन और विसीन होता है। चारेंटिन ब्लड शुगर लेवल को लगातार कम रखने में मदद करता है। वहीं विसीन शरीर में जाकर ग्लूकोज के अवशोषण को रोकता है, जिससे खाने के बाद अचानक शुगर लेवल नहीं बढ़ता।
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डायबिटीज विशेषकर टाइप-2 डायबिटीज में अक्सर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। करेले का जूस सेल्स को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे सेल खून से ग्लूकोज को आसानी से सोख लेती हैं और उसे एनर्जी में बदल देती हैं।
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करेले का नियमित सेवन पैन्क्रियाज की बीटा-सेल्स को उत्तेजित करता है, जो शरीर में इंसुलिन बनाने का काम करती हैं। इससे शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का उत्पादन सुधरता है।
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डायबिटीज के मरीजों में दिल की बीमारी और वजन बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है। करेले में कैलोरी बहुत कम और फाइबर ज्यादा होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और वजन को नियंत्रण में रखने में मदद करता है।