गुजरात से साइबर धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 72 वर्षीय व्यक्ति से 1.47 करोड़ रुपये ठग लिए गए। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों को ठगी के नए तरीकों से सावधान रहने की अपील की है। गृह मंत्रालय के साइबर सुरक्षा विभाग ने बताया कि ठगों ने सीबीआई, ईडी और अन्य एजेंसियों का अधिकारी बनकर बुजुर्ग से बात की। इस दौरान उन्हें लगातार डराया और पैसे ठगते रहे।
साइबर विंग के अधिकारियों ने बताया कि वीडियो कॉल और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए ठगों ने मनगठंत कहानी बनाई। इस कहानी के आधार पर उन्होंने बुजुर्ग पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा
ठगों ने बुजुर्ग से कहा कि वह आपराधिक गतिविधियों में लगे हुए थे और उनकी डिजिटल जानकारी लीक होने के बाद पुलिस को सब पता चल चुका है। दबाव बढ़ाने के लिए ठगों ने बुजुर्ग को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। इस दौरान बुजुर्ग हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी गई। अधिकारियों के अनुसार पीड़ित को लगभग 28 दिनों तक लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव का शिकार बनाया गया। ठगों ने बुजुर्घ से कहा कि अगर उन्होंने परिवार के सदस्यों को इस बारे में बताया या किसी से मदद लेने की कोशिश की तो उनकी कानूनी स्थिति और बिगड़ जाएगी। जालसाजों ने पीड़ित पर कंट्रोल बनाए रखने के लिए उन्हें लगातार डराया और दबाव बनाए रखा।
सेटलमेंट के बहाने ठगे करोड़ों रुपये
ठगों ने पैसे का वेरिफिकेशन करने के नाम पर कई बार बुजुर्ग से अपने खाते में पैसे ट्रांसफर कराए। इसके बाद केस बंद करने के नाम पर भी पैसे ऐंठे। बुजुर्ग को लगा कि वह खुद को बचाने के लिए पैसे दे रहे हैं और उन्होंने कुल 1.47 करोड़ रुपये आरोपियों के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।
गृह मंत्रालय ने दी चेतावनी
गृह मंत्रालय के साइबर विभाग ने कहा कि इस तरह के घोटाले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें धोखेबाज भय और विश्वास का फायदा उठाते हैं। असल में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती, लेकिन अपराधी पीड़ितों को अलग-थलग करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। अधिकारियों ने साफ किया कि कोई भी वैध कानून प्रवर्तन एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी या जांच नहीं करती है, न ही वे सत्यापन या मामले के निपटारे के लिए पैसे ट्रांसफर करने की मांग करते हैं।
1930 पर करें शिकायत
सरकार ने साइबर अपराध की रिपोर्टिंग के लिए तंत्र को भी मजबूत किया है। ठगी की घटना का संदेह होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर घटनाओं की रिपोर्ट करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि डर ऑनलाइन जालसाजों का सबसे शक्तिशाली हथियार है। ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि लोग धमकी भरे फोन को गंभीरता से न लें। भले ही सामने वाला किसी भी एजेंसी से होने का दावा कर रहा हो। असली पुलिसकर्मी या दूसरी एजेंसी के अधिकारी खुद जाकर गिरफ्तारी करते हैं।
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