गुजरात के निर्भया कांड के दोषी की वडोदरा सेंट्रल जेल में हार्ट अटैक से मौत हो गई। भरूच के झघड़िया जीआईडीसी में 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या के मामले में आरोपी विजय पासवान को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया था। हालांकि, अब दोषी की मौत के बाद उसकी पत्नी ने पूरे मामले में गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
16 दिसंबर 2024 की है घटना
यह मामला दिसंबर 2024 का है। 16 दिसंबर को झघड़िया जीआईडीसी इलाके में रहने वाले झारखंड मूल के मजदूर परिवार की 10 वर्षीय बच्ची अचानक लापता हो गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी बच्ची को सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ अमानवीय दुष्कर्म किया। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए उसकी हत्या कर दी।
गंभीर रूप से घायल होने के बाद बच्ची की हो गई थी मौत
बच्ची गंभीर हालत में झाड़ियों से मिली थी। उसके मुंह, पेट और प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोटें थीं। उसे वडोदरा की सयाजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आठ दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसकी मौत हो गई।
मई 2025 में सुनाई गई थी फांसी
मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने विशेष टीमें गठित कर जांच शुरू की। सीसीटीवी, तकनीकी सर्विलांस और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर विजय पासवान को गिरफ्तार किया गया। फरवरी 2025 में मुकदमा शुरू हुआ और मई के पहले सप्ताह में अदालत ने फैसला सुनाया था। अदालत ने विजय पासवान को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
अब वडोदरा सेंट्रल जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे सयाजी अस्पताल लाया गया, जहां हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। हालांकि, दोषी की पत्नी ने पति को निर्दोष बताते हुए जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरे एक अन्य मामले में गुजरात के वलसाड में 6 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या करने वाले एक अन्य शख्स को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
दोषी की पत्नी बबीता देवी का सामने आया बयान
मृतक की पत्नी बबीता देवी ने कहा, "मेरे पति को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। असली आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना को दूसरे लोगों ने अंजाम दिया था, लेकिन उचित जांच नहीं होने के कारण मेरे पति को सजा मिली। सरकारी वकील ने भी अदालत में हमारा पक्ष सही तरीके से नहीं रखा। अब अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में मेरे पति की मौत हो गई है। हमें न्याय मिलने तक हम शव स्वीकार नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाए।"
सत्यम नेवस्कर की रिपोर्ट
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