सरकार और प्रशासन की ओर से अक्सर सरकारी जमीन पर कंस्ट्रक्शन करने वालों को नोटिस जारी किया जाता है और फिर उन्हें तोड़ दिया जाता है। यह काफी आम बात होती है। लेकिन गुजरात के नर्मदा जिले के इतिहास में पहली बार सरकारी अफसरों पर कानून का शिकंजा कसा है। यहां प्रशासन ने कुछ बड़े सरकार अधिकारियों के गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन पर कार्रवाई की है और जेसीबी की मदद से इन्हें तोड़ दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सामने आई जानकारी के अनुसार, साल 2019 में नर्मदा जिले के गरुड़ेश्वर में उस समय के जिला कलेक्टर आर.एस. निनामा ने उस समय के 11 बड़े सरकारी अफसरों को रहने के लिए प्लॉट दिए थे। लेकिन, यह प्लॉट मिलने के बाद अफसरों ने तय समय में कोई कंस्ट्रक्शन नहीं किया। इतना ही नहीं, प्रशासन ने रविवार को छुट्टी के दिन 10 JCB मशीनें लगाकर इन 11 में से 5 के गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन को तोड़ दिया। आमतौर पर गरीबों के आशियानों या झोपड़ियों पर बुलडोजर चलने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन नर्मदा जिले के इतिहास में पहली बार सरकारी अफसरों पर कानून का शिकंजा कसा है।
10 JCB मशीनों का इस्तेमाल
गरुड़ेश्वर में, प्रशासन ने रविवार को छुट्टी के दिन 10 JCB मशीनों का इस्तेमाल करके नर्मदा जिले के उस समय के 11 बड़े अधिकारियों को दिए गए प्लॉट पर बने गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन को गिराने के लिए डेमोलिशन ड्राइव बुलाया था। अधिकारियों के रहने का मकसद था, किसी ने भी इसे समय पर नहीं बनाया। 13 में से 7 बंगले थे, यह कंस्ट्रक्शन रहने के लिए नहीं था। यह एक कमर्शियल एक्टिविटी थी यानी होम स्टे और गेस्ट हाउस जैसा कंस्ट्रक्शन।
अधिकारियों की लिस्ट
1. के.डी. भगत, उस समय प्रोविंशियल ऑफिसर और अभी एडिशनल कलेक्टर।
2. बी.डी. मोदिया, उस समय इलेक्शन ऑफिसर (नर्मदा) और अभी गांधीनगर सेक्रेटेरिएट में काम कर रहे हैं।
3. वी.वी. मचार, उस समय ममलतदार और अब रिटायर्ड ऑफिसर।
4. एच.वी. गामित, उस समय टाउन प्लानर (नर्मदा) और अभी सीनियर टाउन प्लानर (अवार्ड ब्रांच, गांधीनगर)।
5. स्वर्गीय डी.एन. चौधरी, उस समय प्रोविंशियल ऑफिसर (देदियापाड़ा)।
ये भी पढ़ें- नवसारी में युवाओं को पुलिस का मजाक उड़ाना पड़ा भारी, वीडियो वायरल हुआ तो मांगनी पड़ी माफी
अरिजीत सिंह, नोरा फतेही और कपिल शर्मा के शो का झांसा देकर 1.41 करोड़ की ठगी, सूरत में चौंकाने वाली घटना