1. Hindi News
  2. हेल्थ
  3. क्या तनाव और नींद की कमी से मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

क्या तनाव और नींद की कमी से मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि में असामान्य बदलाव के कारण बार बार दौरे पड़ सकते हैं। यह समझना जरूरी है कि तनाव या नींद की कमी अपने आप में मिर्गी का कारण नहीं हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले से मिर्गी है, उनमें ये दौरे पड़ने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

क्या तनाव और नींद की कमी से मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर - India TV Hindi
Image Source : MAGNIFIC क्या तनाव और नींद की कमी से मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

आज की लाइफस्टाइल में तनाव और नींद की कमी आम समस्याएं बन गई हैं। काम का दबाव,पढ़ाई,अनियमित दिनचर्या और लगातार बढ़ती व्यस्तता के कारण कई लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। हालांकि,इसका असर केवल थकान और चिड़चिड़ेपन तक सीमित नहीं रहता। कुछ लोगों में तनाव और नींद की कमी मिर्गी के दौरे पड़ने की आशंका भी बढ़ा सकती है। डॉ. सुनील अग्रवाल, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, फोर्टिस, ग्रेटर नोएडा बता रहे हैं इसके पीछे का कारण। 

क्यों बढ़ जाता है मिर्गी का खतरा?
मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि में असामान्य बदलाव के कारण बार बार दौरे पड़ सकते हैं। यह समझना जरूरी है कि तनाव या नींद की कमी अपने आप में मिर्गी का कारण नहीं हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले से मिर्गी है, उनमें ये दौरे पड़ने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। हालांकि,हर व्यक्ति में इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता। नींद हमारे मस्तिष्क के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। पर्याप्त नींद न मिलने पर मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को दौरा पड़ने की आशंका बढ़ सकती है। इसी तरह,लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहने से शरीर और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। तनाव के कारण नींद का बिगड़ना, समय पर भोजन न करना और दवाइयां लेना भूल जाना भी दौरे की आशंका बढ़ा सकता है।

घर वालों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
घर वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि मिर्गी का इलाज केवल दवाइयों तक सीमित नहीं है। मरीज की दिनचर्या और परिवार का सहयोग भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। मरीज को नियमित समय पर सोने और जागने, पर्याप्त नींद लेने और तनाव कम करने की कोशिश करनी चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयां समय पर लेना भी बेहद जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करना या उसकी खुराक बदलना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार के सदस्यों को दौरे के दौरान घबराने के बजाय मरीज को सुरक्षित जगह पर करवट से लिटाना चाहिए। उसके आसपास मौजूद नुकीली या कठोर चीजें हटा देनी चाहिए। मरीज को जबरदस्ती पकड़ने या उसके मुंह में कोई वस्तु डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक रहे, दोबारा दौरा पड़े या मरीज को सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि हर दौरा मिर्गी के कारण ही नहीं होता। सही समय पर जांच, उचित इलाज और परिवार का सहयोग मरीज को बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकता है।

Latest Health News