Powerfood: भारत में ज्वार को सूपरफुड माना जाता है। ये एक ऐसा अनाज है जो कि कई रोगियों को खाने की सलाह दी जाती है और इसका असर व्यापक तौर पर देखा जाता है। ज्वार की खास बात ये है कि ये ग्लूटेन-फ्री फूड है, जो सीलिएक रोग वाले व्यक्तियों के लिए बेहद जरूरी होता है। क्योंकि ऐसे लोगों को गेहूं से बनी चीजों के एलर्जी होती है। साथ ही ज्वार में आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे आवश्यक खनिज भी होते हैं जो कि बॉडी को एनर्जेटिक बनाए रखने, मांसपेशियों को मजबूती देने और मेटाबोलिक बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
इन बीमारियों में खुद डॉक्टर देते हैं ज्वार खाने की सलाह
1. डायबिटीज
ज्वार का सेवन डायबिटीज के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें फाइबर, रफेज होने के साथ कई प्रकार के बायोएक्टिव इंग्रीडिएंट्स होते हैं जो कि इंसुलिन प्रोडक्शन को बढ़ाते हैं और शुगर मेटाबोलिज्म को तेज करते हैं। ये डायबिटीज में शुगर कंट्रोल करता है और शुगर बढ़ने के दूसरे लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसलिए डायबिटीज में इस अनाज को जरूर खाएं।
2. सीलिएक रोग
सीलिएक रोग से पीड़ित लोग जो ग्लूटेन फ्री फूड नहीं लेते हैं, उनमें आंतों के लिंफोमा और छोटी आंत के कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर विकसित होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में डॉक्टर इन्हें ग्लूटेन फ्री ज्वार का सेवन करने को कहते हैं। तो, ऐसे रोगी इन अनाज को आराम से बैठकर खा सकते हैं।
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3. एनीमिया
एनीमिया में शरीर में खून की कमी हो जाती है। ज्वार आवश्यक खनिजों लोहा और तांबे से भरपूर होता है जो शरीर में खून के प्रवाह और सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करते हैं। ऐसे में इस बीमारी में ज्वार का सेवन एनीमिया से बचा सकता है और खून की कमी को दूर कर सकता है। तो, अगर आप एनीमिया के मरीज हैं तो ज्वार खाएं।
4. बवासीर
बवासीर की बीमारी में अक्सर लोगों को कब्ज की समस्या हो जाती है या फिर मल सूख जाने की वजह से मलत्याग में दिक्कत होती है और शरीर में सूजन और खून की कमी बढ़ती है। ऐसी स्थिति में फाइबर और रफेज से भरपूर ज्वार खाना आपके पाचन क्रिया को तेज करता है, बॉवेल गति को तेज करता है और फिर बवासीर की समस्या से बचाने में मदद करता है।
(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)
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