भारत में कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ प्लाज्मा थेरेपी एक बड़े हथियार के रूप में माना जा रहा हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस थेरेपी के नतीजे को सही बताया था। इस बात को कई डॉक्टर्स भी सही मान रहे हैं। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, ''भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसके इलाज के लिए विभिन्न तरीकों पर ट्रायल कर रहे हैं, जिनमें प्लाज्मा थेरेपी भी एक है। अभी भी यह ट्रायल स्तर पर ही और इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इसके इलाज से कोरोना का मरीज पूरी तरह ठीक हो जाएगा।' ऐसे में सवाल उठता है कि वाकई प्लाज्मा थेरेपी इस महामारी से निजात दिला सकती हैं या फिर खतरनाक साबित हो सकती हैं।
इंडिया टीवी के खास शो में डॉक्टरों के पैनल में इस बारे में पूरी सच्चाई बताई कि आखिर प्लाज्मा थेरेपी से रिस्क है कि नहीं।
डाक्टर पद्मा श्रीवास्तव के अनुसार अभी तक इसके बारे में कहना सही होगा कि यह फायदेमंद हैं। लेकिन इसे ट्रीटमेंट मान लेना सही नहीं होगा।
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चीन से डॉक्टर संजीव चौबे का कहना हैं कि प्लाज्मा थेरेपी लोगों के लिए थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। प्लाज्मा थेरेपी हर किसी की बॉडी को शूट करें ये भी कहना थोड़ा मुश्किल है।
अमेरिका से डॉक्टर अंबिका पंडिता का कहना है कि हमें प्लाज्मा थेरेपी से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। कई ऐसे भी मामले सामने आए है जिन्हें प्लाज्मा द्वारा सही किया गया है। लगातार इसमें रिसर्च की जानी चाहिए।
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डॉक्टर पद्मा के अनुसार कई मामले ऐसे सामने आए हैं जिन्हें एक भी कोविड-19 के लक्षण सामने आ चुके हैं। लेकिन टेस्ट करने में पॉजिटिव आया है। कई लोगों को लकवा, हार्टअटैक, स्ट्रोक के लक्षण भी सामने आ रहे हैं। इसके अलावा 30 से 40 उम्र के संक्रमित लोगों के खून की नली में क्लॉट बन रहा है जिससे लकवा हो जा रहा है।
डॉक्टर संजीव चौबे के अनुसार इसके लक्षण पहले दिन से 28 दिन के बीच आ सकते है। अगर इससे बचना है तो घर पर रहें सुरक्षित रहें। क्योंकि करोना वायरस का अभी तक कोई इलाज और वैक्सीन नहीं बनीं है।
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