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सुबह उठते ही अकड़ जाते हैं हाथ-पैर? डॉक्टर ने बताया आर्थराइटिस के किन संकेतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?

सुबह उठने के बाद आपके हाथ पैर में अकड़न या क्रैम्प आने लगती है तो यह आर्थराइटिस का भी संकेत हो सकता है, डॉक्टर बता रहे हैं किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?

आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण- India TV Hindi
Image Source : UNSPLASH आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण

सुबह सोकर उठने के बाद हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होना, उंगलियों को मोड़ने में परेशानी होना या जोड़ों में दर्द रहना आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। आमतौर पर लोग इसे उम्र बढ़ने, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार ऐसा होना जोड़ों से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में निदेशक एवं प्रमुख, ऑर्थोपेडिक्स, डॉक्टर एच.एस. छाबड़ा बता रहे हैं कि किन संकेतों को आपको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

आर्थराइटिस के प्रकार

डॉक्टर एच.एस. छाबड़ा कहते हैं कि आर्थराइटिस कई प्रकार का होता है, जिसमें रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस प्रमुख हैं। 

  • रूमेटाइड आर्थराइटिस: रूमेटाइड आर्थराइटिस में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है, जिससे उनमें सूजन, दर्द और अकड़न होने लगती है। इसमें सुबह उठने के बाद अकड़न आमतौर पर 30 मिनट से अधिक समय तक रह सकती है। 

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस: वहीं, ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है, जिससे चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या कोई सामान उठाने पर दर्द हो सकता है। इसके अलावा जोड़ों में सूजन, गर्माहट, लालिमा, उंगलियों की पकड़ कमजोर होना और घुटनों में दर्द भी इसके लक्षण हो सकते हैं। 

आर्थराइटिस के इन संकेतों को नहीं करना चाहिए नज़रअंदाज़

डॉक्टर के अनुसार, सुबह उठने पर हाथ-पैरों या जोड़ों में लंबे समय तक रहने वाली अकड़न, सूजन, लालिमा और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए । अगर आपको यह समस्या कई दिनों तक रहे तो फौरन डॉक्टर से मिले 

कैसे कर सकते हैं इस समस्या को कंट्रोल?

डॉक्टर कहते हैं कि अगर ये परेशानियां लगातार बनी रहती हैं या धीरे-धीरे बढ़ रही हैं तो इन्हें सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज करने की बजाय डॉक्टर से मिलें। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेकर जरूरी जांच कराना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही नियमित हल्का व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित खानपान और जोड़ों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचना भी फायदेमंद हो सकता है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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