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बचपन में हकलाते थे ये एक्टर्स, लेनी पड़ी स्पीच थेरपिस्ट से मदद, लिस्ट में कपूर खानदान का चिराग भी है शामिल

International Stuttering Awareness Day 2025: हकलाना एक स्पीच डिसऑर्डर है जो किसी को भी हो सकता है। सही इलाज और थेरिपी से इसे ठीक या कम किया जा सकता है। लेकिन आज भी समाज में ऐसे लोगों को मजाक का पात्र बनना पड़ जाता है जबकि कई बॉलीवुड स्टार्स भी बचपन में हकलाने की समस्या से जूझ चुके हैं।

स्टटरिंग करते थे ये एक्टर- India TV Hindi
Image Source : ANIMAL MOVIE स्टटरिंग करते थे ये एक्टर

हकलाना कोई बीमारी नहीं है बल्कि ये स्पीच डिसऑर्डर है। बॉलीवुड के कई स्टार्स इस बारे में खुलकर बात कर चुके हैं। एक्टर ऋतिक रोशन से लेकर रणबीर कपूर, शरद केलकर और फरहा खान तक को बचपन में स्टटरिंग यानि हकलाने की समस्या झेलनी पड़ी है। हर साल 22 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस (International Stuttering Awareness Day) मनाया जाता है। समाज में रहने वाले इन लोगों को समझने और स्वीकार करने के लिए जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं। हकलाना कोई बीमारी नहीं सिर्फ एक स्पीच डिसऑर्डर है जो बचपन में काफी लोगों को होता है। बॉलीवुड में ऐसे कई स्टार्ट हैं जिन्हें बचपन में हलकाने की समस्या से जूझना पड़ा।

बचपन में हकलाते थे ये एक्टर

सुपरस्टार ऋतिक रोशन ने एक इंटरव्यू में बताया कि बचपन में उन्हें हकलाने की वजह से दोस्तों चिढ़ाते थे। उन्हें इसके लिए थेरिपी भी लेनी पड़ी। वहीं रणबीर कपूर भी इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि बचपन में उन्हें बोलने में परेशानी होती है। यहां तक कि वो अपना नाम भी सही से नहीं बोल पाते थे। रणबीर कपूर का कहना है कि आज भी कई बार उन्हें इस मुश्किल से गुजरना पड़ता है। लेकिन ये कोई शर्मिंदगी की बात नहीं है। थोड़ा मेडिटेट करके और कोशिश करके उन्होंने अपने स्पीच को काफी सुधारा है। 

आज अपनी आवाज से पहचाने जाते हैं

वहीं बाहुबली से प्रभास की आवाज बने एक्टर और वाइस आर्टिस्ट शरद केलकर जो आज अपनी आवाज से भी पहचाने जाते हैं उन्हें भी बचपन में हकलाने की समस्या होती थी। लोग उनका मजाक उड़ाते थे और कई बार उन्हें इसकी वजह से शोज से निकाला गया है। बाद में शरद केलकर ने अपने ब्रीदिंग पैटर्न में बदलाव किया। डायलॉग बोलते वक्त वो सांस लेने लगे जिसकी वजह से हकलाना कम होता गया। 

स्टटरिंग या हकलाना क्या है?

स्टटरिंग यानि हकलाना वो स्थिति है जिसमें बोलने की गति में कई बार रुकावट आ जाती है। कई बार कोई शब्द आप नहीं बोल पाते और उसे बोलने में अटक जाते हैं। कई बार बोलने से पहले शब्दों का लंबा गैप आ जाता है। अक्सर  बचपन में ये समस्या ज्यादा होती है। हकलाहट के पीछे, जेनेटिक और पर्यावरण से जुड़े कारण हो सकते हैं। भले ही हकलाना बीमारी नहीं है, लेकिन जो इससे परेशान हैं, उनके लिए यह चुनौतीपूर्ण और निराश करने वाली स्थिति होती है।'

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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