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क्या है 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला? क्या वाकई इससे घटता है वजन?

वजन घटाने के लिए लोग इन दिनों कई तरह के उपाय अपना रहे हैं। ऐसे में इस बीच 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला काफी पॉपुलर हो रहा है। इसे वजन घटाने में ज्यादा कारगर माना जा रहा है। चलिए जानते हैं क्या है 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला।

क्या है 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला? क्या वाकई इससे घटता है वजन?- India TV Hindi
Image Source : MAGNIFIC क्या है 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला? क्या वाकई इससे घटता है वजन?

आज के समय में मोटापा एक कॉमन प्रॉब्लम है। मोटापे की समस्या से परेशान लोग वजन घटाने के लिए कई तरह के फॉर्मूला अपनाते हैं। ऐसे में इन दिनों वजन घटाने और फिटनेस की दुनिया में आजकल 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला काफी लोकप्रिय हो रहा है। जापान की शिनशू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा खोजा गया यह वॉकिंग मेथड नॉर्मल वॉकिंग की तुलना में अधिक असरदार माना जाता है।  ऐसा माना जा रहा है कि इस वॉकिंग फॉर्मूला से तेजी से वजन घटाने में मदद मिलती है। चलिए जानते हैं। 

क्या है 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला?  
3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला दरअसल इंटरवल वॉकिंग का ही एक रूप है। इसमें आपको एक ही रफ्तार में चलने के बजाय अपनी रफ्तार को समय-समय पर बदलना होता है। इस वॉकिंग फॉर्मूला में आप 3 मिनट सामान्य या धीमी रफ्तार से वॉक करते हैं। इसमें आराम से टहलें ताकि हार्ट रेट नॉर्मल रहे। इसके बाद 3 मिनट तेज़ वॉक करें। इसमें अपनी रफ्तार बढ़ाएं, बांहों को चलाएं और इतनी तेज़ चलें कि सांस थोड़ी फूले।  फिर इसी प्रक्रिया को 3 से 5 बार दोहराएं। 

क्या वाकई इससे घटता है वजन?

नॉर्मल वॉकिंग की तुलना में 3-3-3 फॉर्मूला वजन घटाने में ज्यादा कारगर साबित होता है। जब आप धीमी और तेज़ गति के बीच बदलाव करते हैं, तो शरीर को अधिक एनर्जी लगानी पड़ती है। इससे नॉर्मल वॉक के मुकाबले ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। हाई और लो इंटेंसिटी का यह कॉम्बिनेशन मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है। लगातार भागने या जिम जाने की तुलना में 18-30 मिनट की यह वॉक जोड़ों पर दबाव नहीं डालती, जिससे इसे लंबे समय तक कर पाना आसान होता है। 

3-3-3 वॉकिंग क्यों बेहतर मानी जाती है?
कार्डियो सेहत और स्टैमिना: जब आप 3 मिनट तेज़ चलते हैं, तो आपकी धड़कन बढ़ती है जिससे दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। अगले 3 मिनट धीमा चलने से रिकवरी का समय मिलता है।

मेटाबॉलिज्म और वजन नियंत्रण: रफ्तार बदलने के कारण शरीर को प्लेटो में जाने का मौका नहीं मिलता। यह आफ्टरबर्न इफेक्ट को बढ़ावा देती है, जिससे वॉक के बाद भी कैलोरी बर्न होती रहती है।

ब्लड शुगर और बीपी नियंत्रण: शोध के अनुसार, नॉर्मल वॉक की तुलना में इंटरवल वॉकिंग इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने और बीपी को कंट्रोल करने में मददगार है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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