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कंबल रजाई से कैंसर हो जाएगा? डॉक्टर ने बताई क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई, कितना है खतरा

Blanket And Cancer Connection: क्या कंबल ओढ़कर सोने से कैंसर हो सकता है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। जिसमें माइक्राइबर वाले ब्लैंकेट से कैंसर होने का खतरा बताया जा रहा है। जानिए क्या है इसकी सच्चाई।

कंबल से कैंसर का खतरा?- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK कंबल से कैंसर का खतरा?

सर्दियों में कंबल ओढ़कर सोना सबसे बड़ा सुख है। बढ़ती ठंड के कारण रजाई कंबल से निकलने का मन नहीं करता है। हम अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा कंबल ओढ़कर सोते हुए बिताते हैं, लेकिन क्या वाकई हमारे कंबल हमें बीमार कर रहे हैं? जी हां ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जो आपके चैन से सोने के सुख को भी छीन सकते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें कंबल से कैंसर होने की बात की जा रही है। सिंथेटिक कंबलों और रजाई से कैंसर होने के वीडियो वायरल हो रहे हैं। अब इसकी सच्चाई जाने माने कैंसर सर्जन डॉक्टर जयेश शर्मा ने एक वीडियो शेयर कर बताई है। डॉक्टर ने बताया कंबल से कैंसर होने वाले वीडियो में क्या सच है और क्या वाकई इससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।

क्या कंबल से कैंसर होता है? 

डॉक्टर जयेश शर्मा ने बताया कि कंबल पॉलिएस्टर के बने होते हैं ये बात सही है। पीएफएएस हमारे लिए खतरनाक हैं ये भी बात सही है। पॉलिएस्टर बनाने में एंटीमनी जैसे रसायनों का इस्तेमाल भी हो सकता है। एंटीमनी के कैंसर से रिश्ता होने के भी सबूत हैं। इसलिए अगर आप बच्चे को या खुद पॉलिएस्टर का कंबल ओढ़कर सो रहे हो तो कैंसर हो जाएगा। बच्चे को पीसीओडी हो जाएगा ऐसा बिल्कुल गलत है।

दरअसल एंटीमनी एक कैटलिस्ट होता है जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने में किया जाता है। ये प्लास्टिक से बहुत भारी और महंगा होता है। इसलिए प्लास्टिक के साथ फ्री में एंटीमनी देना न कंपनी के लिए अच्छा है और न आपकी सेहत के लिए अच्छा है। अगर कंबल में जरा बहुत रह भी जाता है तो त्वचा से शरीर के अंदर जाने की इसकी बहुत न के बराबर संभावना है। इसलिए एंटीमनी से कंबल के जरिए कैंसर हो जाना कोई बहुत खतरा नहीं है। PFAS एक कंपाउंड है जो चीजों को वॉटर प्रूफ बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। कंबल में पीएफएएस या तो नहीं होता या बहुत ही कम होता है। 

प्लास्टिक या कॉटन के कण फेफड़ों में जाने से नुकसान

एक और कारण है प्लास्टिक कम करने का और वो है माइक्राफाइबर और माइक्रोप्लास्टिक जो कंबल से सांस के जरिए हमारे फेफड़ों में जा सकता है। अगर ये फेफड़ों में बहुत ज्यादा मात्रा में जाता है तो इससे इरिटेशन हो सकती है। एलर्जी हो सकती है, लेकिन जो कहा जाता है कि कॉटन के मैक्रोफेजेज सांस लेने से शरीर में जाते हैं उन निकल जाते हैं। 

रुई की रजाई में फंगस का खतरा

वैसे कॉटन के अपने रिस्क हैं। कॉटन नमी को सोखता है जिससे उसमें फंगस पैदा हो सकती है। डस्ट माइट्स पैदा होने का और बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है। मानसून के बाद आपने महसूस किया होगा कि जो स्मैल रजाई या कॉटन के कपड़ों में आती है। वो फंगस और नमी के कारण ही आती है। वैसे रुई की रजाई ज्यादा अच्छी होती है। लेकिन तकिया के अंदर भी माइक्रोफाइबर होते हैं उसे लेकर भी ऐसा ही कहा जाता है। ऐसी खबरों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाने लगा है जिससे नींद खराब होती है। और नींद खराब होने से आपकी सेहत को कंबल और रजाई से कहीं ज्यादा नुकसान होगा। 

कंबल रजाई का इस्तेमाल करते वक्त ध्यान रखें

अगर सिंथेटिक ब्लैंकेट यानि कंपल इस्तेमाल कर रहे हैं तो उन्हें धो लें, जिससे उसके लूज फाइबर्स निकल जाएं। अगर कॉटन की रजाई इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे समय-समय पर धूप दिखाते रहें। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

 

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